भर्ती

September 12, 2016






तीसरे सेमेस्टर के पेपर चल रहे थे और मैं हमेशा की तरह टाइम से 2 घंटे पहले पहुंच चूका था. क्योकि ये टाइम मेरी तैयारी का 90% हिस्सा होता था. पेपर शुरू होने में करीब करीब 5 मिनट थी पर मेरा एक खास दोस्त अभी तक लापता था. चलो कोई ना 'आता होगा' ये सोच कर मैं सिटींग प्लान देखके क्लास की तरफ खिसक लिया. अब पेपर शुरू हुए 10 मिनट हो चुकी थी लेकिन उसकी सीट अभी तक खाली थी. अब मैं थोड़ा सा टैंशनते हुए कोने पर पड़े मेरे बैग मेंसे फ़ोन निकलते हुए बाथरूम की तरफ निकल पड़ा. वहाँ जाते ही फ़ोन घुमाया

मैं : हैल्लो आशीष 
आशीष : हा भाई
मैं : कहा है भाई
आशीष: भाई गाव में आर्मी की भर्ती चल रही है वो ही देखने आ रख हुँ
मैं : अच्छा रे आज तो पेपर था
आशीष: कोई न भाई पेपर तो अगली बार दे दूँगा। अगर सिलेक्ट हो गया तो क्या पता पेपर देना ही न पड़े
मैं : अच्छा भाई फिर ढंग से फाड़ दियो भर्ती वैसे भी पेपर तो तुझे दुबारा देना ही पड़ता ( हँसते हुए ).
आशीष: हां ठीक कह रहा है भाई ( हँसते हुए )
मैं : राम राम
आशीष: राम राम भाई

अब मुझे थोड़ा अच्छा लग रहा था की भाई जो करना चाहता है उस के लिए ही मेहनत कर रहा है. और मैं जाकर आराम से अपना पेपर करने लग गया.
और हरियाणा में ना जाने कितने आशीष सेना में भर्ती होने के लिए कितनी चीज़ो से समझौता करते है. कितने पेपर छोड़ते है और न जाने कितनी जगह भर्ती देखने जाते है की कब मौका मिले देश की सेवा में बन्दूक उठने का.





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