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Showing posts from October, 2016

ना चाहिये

" ना चाहिए "  (PDF)



रपिये हो या ताकत का घणा जोर दिखाणा ना चाहिये कदे पासे उलटे पड़ जा से ज्यादा अकड़ में आणा ना चाहिये
राज हो या हो यारी कोई हर किसे ते बताणा ना चाहिये रोला हो या प्यार कोई घरक्या ते छुपाणा ना चाहिये
जमीन हो या गायका कदे मोल लगाणा ना चाहिये ये माँ बराबर होवे से इन्हें बेच के खाणा ना चाहिये
किसे बोदे और गरीब का  कदे दिल दुखाणा ना चाहिये औरा की मजबूरी का घणा फायदा ठाणा ना चाहिये
दगाबाज और दुश्मन गेल्या बैठ के खाणा ना चाहिये कन्या पे अर नारी पे कदे हाथ उठाणा ना चाहिये
‘दीप’ चाहे हो हाल बुरे पर किसे ते बताणा ना चाहिये

शहीद

शहीद PDF 



वो रोज धमाके सुनते है
जीते हैं जंग के साये में
वो खडे हुए हैं सीमा पर
ले असला अपनी बाहों में

गोलियों की बरसात में
वो लाल लहू से नहाते हैं
होली हो या दिवाली हो
सब सीमा पर ही मनाते हैं

इक आस जो घर पर जाने की
जो पल भर में धुल जाती है
सीमा पार से आकर गोली
साथी को डंस जाती है

फिर कहते हैं इस हालत में
हम घर को जा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं लेकिन
सर झुका सकते नहीं
फिर खून खौल सा जाता है
रह रह कर गुस्सा आता है
वो घुंट लहू का पीते हैं
मर मर कर फिर भी जीते हैं

इस वतन चमन के खातिर
अपनी जान देश पर वार गए
खाकर गोली सीने पर वो
सीधे स्वर्ग सीधार गए

सजा तिरंगे में अर्थी‎ जब
घर पर लाई जाती है
याद करा कर कुर्बानी
गोलियां चलाई जाती हैं

सरकारी दलाल भी आते हैं
शहादत गिनाई जाती है
लाख रुपे का चैक दिखा कर
फोटो खिचवाई जाती है

बस इतना सा ये किस्सा है
बस इतनी सी ये कहानी है
ना इनका कोई बुढ़ापा है

केंद्रीय विद्यालय - रोहिणी

कुछ जगह या चीज़े ऐसी होती है जिनसे इंसान का दिल से लगाव होता है. जैसे अपने लिए  केंद्रीय विद्यालय है. क्यों की भईया अपनी तो स्कूलिंग केंद्रीय विद्यालय की ही है तो मैं तो कहूँगा ही. कुछ दिनों पहले केंद्रीय विद्यालय रोहिणी में जाना हुआ. जाना तो क्या हुआ था पेशी हुई थी क्योकि मामा कोटीचर ने प्रेम पत्र भेजा था की आपका बच्चा कुछ ज्यादा ही होनहार है और आप आकर एक बार मिल ले. अब अपन भी मामू के साथ खिसक लिए स्कूल के लिए. तब प्रिंसिपल सर के साथ मामा की पेशी शुरू हुई तब मैं बाहर आकर गैलरी में बैठ गया. तो भाई वहाँ गैलरी में देखो तो वो ही स्काउट गाइड के पेडल पावेल की फोटो, बच्चो की कलाकारियाँ, ज्ञान भरी बाते, और प्राथना से सारी गैलरी भरी हुई थी. सब कुछ वैसा ही था जैसे अपने ज़माने में होता था. बस सफ़ेद शर्ट और ब्लू पेंट हुई करती थी अब तो सारा मामला रंग बिरंगा हो चूका है. तब मुझे कुछ चुल्ल हुई तो अपना फोन निकाल लिया और सर नीचे करके फेसबुक चलाने लग गया.
तभी एक छोटू आया और बोला “ भईया टेम्पल रन खिलाओ ना  “
मैंने कहा “ नहीं है यार ले अस्फाल्ट खेल ले “
फिर उसने 2 मिनट तक कोशिश किया और हाथ हवा में ही घुमाए जाय…

भगत सिंह

भगत सिंह (PDF)



ये सपूत भारत माँ के अकड़ किसी की नहीं सहते सच्चे सूरमे पक्के देशभक्त भगवान भरोसे नहीं रहते
मंजर अपनों की मौत वाला दौड़े आँखों में बन लाल लहु फिर हथियार उठाना पड़ता है तब होश ठिकाने नहीं रहते
तू शेर है भारत माता का दुश्मन के घर घुस वार करे जो पीठ के पीछे ना मारे सीधा सीने पर ही प्रहार करे
देख सामने मौत खड़ी जो क्षण भर भी ना घबराये तब इंकलाब का नारा दे भारत की जय जयकार करे
तू राज दिलों पर करता है तेरा दुनिया में है नाम बड़ा जो तेरा रुतबा बतलाएं इन नोटों की औकात नहीं

|| एक नंबर की बात कही है भाई ने ||