बोल दे आखिरी दिन है

September 29, 2016




थकान भरा दिन खत्म होने की कगार पर था. दिमाग एक दम पक कर गाजर पाक हो गया. कॉलेज से निकलने की तैयारी चल रही थी इंतजार था कब बड़ी सुई 12 पर आये और कब मैं भागू. तभी मेरा दोस्त आया उसके साथ एक लड़की भी थी. दिखने मैं एकदम गुम सुम सी. दोस्त ने इंट्रोडक्शन कराते हुए बताया. ये "नेहा" महाराजा अग्रसेन कॉलेज से है. अगले तीन दिन तक इनका जोइंट सेमिनार है अपने कॉलेज में तो अगले तीन दिन इनसे कोरडीनेट करना है मुझे. अब अपना तो दिमाग वैसे ही डिप्रेसन मोड में था. "बढ़िया है भाई कर कोरडीनेट तू भी क्या याद रखेगा" ये कहते हुए मैंने नेहा को हलके लिहाज से "हाय" कहा और निकल लिया.

अगले दिन कॉलेज पंहुचा तो भाई हमारे कॉलेज में एक गली हुआ करती " गली मतलब लोब्बी अरे वो यार जिसपे फिसलने वाली टाईल्स लगी होती है" तो में उधर से जा रहा था तभी सामने देखा तो नेहा भी आ रही थी. पता तो था आमने सामने है फिर भी वो जमीन देखते हुए निकल गयी और मैं पेड देखते हुए निकल लिया. फिर एक दो बार ऐसे ही आमना सामना हुए और इस तरह दो दिन खत्म हो गए.

तो भाई अब शाम को घर बैठा मैं कुछ नहीं कर रहा था. तो एक दम से सोच आ गयी. जैसा हमे पता ही है की कई बार इस तरह के माहौल में चुल्ल हो ही जाती है. अब दिमाग और मन के बीच में लड़ाई शुरू हो गयी

मन: क्या बात बहुत रेट बढ़ गए तेरे
दिमाग: क्या बात बा ??
मन: अरे " हेल्लो - हाय " तो कर लिया कर.
दिमाग: अरे छोड यार क्या रखा है इन चीजों में..??
मन : रखा तो क्या है जान पहचान हो जायगी.
दिमाग: अरे छोड यार क्या रखा है इन चीजों में..??
मन : अरे फेसबुक पे रिक्वेस्ट भेज दियो " साले एक आधी लड़की भी होनी चाहिए फ्रेंड लिस्ट में "
दिमाग : अरे छोड यार क्या रखा है इन चीजों में..??
मन: साले अभी उम्र है दोस्त बनाने की कर लियो बात
दिमाग : अरे छोड यार क्या रखा है इन चीजों में..??
मन: भाई एक आधी लड़की दोस्त हो तो मन लगा रहता है " तेरी खोपड़ी में ये बात घुसती क्यों नहीं "
दिमाग : अरे छोड यार क्या रखा है इन चीजों में..??
मन: साले कभी 
किसी लड़की से बात भी करेगा या ऐसे ही लंडर लोगो में ही बक्चोदी करता हुआ मरेगा..??
दिमाग : अरे छोड यार क्या रखा है इन चीजों में..??
मन : मैं साले बात करने की कह रहा हूँ शादी करने की नहीं
दिमाग : अरे छोड यार क्या रखा है इन चीजों में..??
मन : भाई कल लास्ट दिन है उसका जो तेरी न फटती हो तो कर लियो बात वरना फट्टू तो तू है ही
दिमाग : अच्छा ..?? चल ठीक है ऐसी बात है तो कल करता हूँ बात " ऐसे कैसे फट्टू कह दिया तुने "
मन : ये हुई बात
दिमाग : अब कल देख तेरा भाई क्या करता है

तो अगले दिन अब मैं नहा-धो के सेंट-वेंट मार के पंहुचा कॉलेज. कहा है नेहा अभी बात करते है
भाई काफी देर तक ढूँढता रहा आज तो बात होके ही रहेगी चाहे कुछ हो जाये.
तभी सामने से नेहा आ गयी....
दिमाग : बात कर ....
नेहा और पास आ गयी
दिमाग : अरे बात कर भाई ....
नेहा बराबर आ गयी
दिमाग : अरे छोड यार क्या रखा है इन चीजों में..??
और चली गयी......
दिमाग : अरे मैं बात करने ही वाला था यार पर 
मन : तू बोल मत BC

फिर दिल और दिमाग ने कई दिनों तक बात नहीं की

You Might Also Like

0 comments

Video

Google +