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इतवार का क्रिकेट मैच



सुबह के 6:00 बज चुके थे और आँख खुली तो पता लगा अरे आज तो रविवार है. और मुझे क्रिकेट खेलने भी जाना है. वैसे सन्डे के दिन ग्राउंड में बड़ी रंगीनिया रहती है चिड़िया – तितली - बुलबुल की मौजूदगी से लौंडो में काफी उत्साह रहता है और वे खेल भावना से आगे बढ़ कर हवाबाजी में भी अपना 100% देने की कोशिश करते है.

कोई मुहँ धोकर तो कोई बिना धोए धीरे धीरे लगभग सब लोग खेलने आ गए और टीम बाट के मैच शुरू हो गया. पर आज कोई लापता नज़र आ रहाँ था. मतलब आ रही थी. लगता है आई ही नहीं होगी.


वैसे मैंने अपने खेल कौशल के बारे में तो बताया ही नहीं. स्वाभाव से आशिकाना और बल्लेबाजी में गंभीरता मेरी काबिलियत है. मोहोल्ले के सबसे घातक बल्लेबाजो में गिनती होती है और छक्को से दुश्मनी ऐसी की जब भी बैट हाथ में लू तो तीन चार को तो मार के ही आऊ. आखिरी बोल पे सिंगल लेना मेरे उसूलों के खिलाफ है.

अब मोहोल्ले के प्लयेर तो सभी जानते ही है जो 2 - 4 बोल खाली निकल दे. बस वो ही हमारी जान को ब्रेट ली हो जाए. तो भाई जैसे तैसे गेम शुरू हुआ और हमारी फिल्डिंग आई और दूसरी टीम 6 ओवर में 40 रन बना गयी.

इस दिन की खास बात ये थी की एक छोटा बच्चा मेरे साइड में खड़ा हो गया और यहाँ वहाँ के सवाल पूछ पूछ के सर दर्द कर रहा.

हमारी बैटिंग शुरू हुई और बल्लेबाजी की जिम्मेदारी मेरे कंधो पर थी. जबकि मेरा दाहिना कंधा दुख भी रहाँ था. और भगवान झूठ ना बुलाए पहले 4 ओवर में मैंने खाली 2 बोल ही खेली और हमारी होनहार टीम ने 4 ओवर में ही 18 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया

अब मैच ऐसे मोड पे आ पंहुचा जब हमे एक ओवर में 14 रन चाहिए थे और मैं बैटिंग कर रहाँ था.


छोटू : भईया हुक मारो
मैं : हाँ मरता हू इस बोल पे .... खाली !!!

पहली बोल खाली 
छोटू : भईया कवर के उपर से मारो कवर के उपर से
मैं : ले इस बोल पे ..... खाली !!!

दूसरी भी खाली
पीछे से आवाज़ आई .... ( विकेट पे बैट मार के आउट हो जा साले )

छोटू : भईया आगे निकल के मारो
मैं : जा तेरी मम्मी बुला रही है
छोटू : नहीं बुला रही झूठे !! 
3 और 4 बोल पे एक - एक रन


छोटू : “भईया हेलिकॉप्टर शोट मारो हेलिकॉप्टर”

वहाँ से कुछ दूर एक सरदार जी व्यायाम कर रहे थे मैंने सोचा “अगर ये यहाँ खड़ा रहाँ तो
ऐसे ही भड़क करता रहेगा इससे अच्छा इसको कही यहाँ - वहाँ कर दू”.

मैं : जा यार उन अंकल से से पूछ के आ “ किद्दा हो अंकल जी “
छोटू : ठीक है जाता हूँ.

तभी बल्लू मेरे पास आया और धीरे से बोला
बल्लू : “ देख वो प्रयंका घूम रही ”.
मैं: “ कहाँ है बे “
बल्लू : वो रही रेड टी-शर्ट में
मैं : अच्छा इसका मतलब समझे बल्लू.
बल्लू : नहीं
मैं: इसका मतलब है “खतरा”
बल्लू : “साले हरवा दिया तूने अपनी टीम को ”
मैं: “ जा बेटा फेक बोल  “

 2 बोल 12 रन आज तो माँ कसम जीना हराम कर देंगे ये.
मन ही मन सोच रहाँ था.
तभी पाचवी बोल आई आधी पिच पे डाल गया बल्लू और मेरे भी बैट पे सही चढ़
गयी फिर तो बस बाउंड्री के बहार ही लैंड हुई. (6 रन )

बल्लू: “तुक्का तुक्का “
मैं: “खतरा खतरा “

आखिरी बोल आई और उतनी ही स्पीड से बहार गयी 6 रन के लिए और किस्मत ऐसी
जंहाँ प्रयंका घूम रही थी वंही लैंड हुई. ये तो घनघोर रोमांच हो गया. इतनी हवाबाजी तो कभी नहीं हुई. और पीछे से वो ही लौंडे लोग मुझे उठाने भागे आ रहे जो 2 मिनट पहले तक गालियाँ दे रहे थे.

इतने मैं छोटू आ गया.
छोटू:  भईया अंकल कह रहे है चढती कला है. ये "चढती कला“ क्या होती है ..???

तभी मैंने छोटू को कहाँ
मैं : जो अभी अभी मेरे साथ हुआ वही होता है... !!!

आज 4 - 5 साल हो चले है उन बातों को पर अब भी कभी उस पार्क के पास से गुजरता हूँ. तो वो दिन चंद सेकंड के लिए दिमाग में घूम जाता है और हलकी सी मुस्कराहट होठों पे तैर जाती है.


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A PHOTOGRAPHIC VISIT TO HARYANVI CULTURE

शहीद

शहीद PDF 



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वो खडे हुए हैं सीमा पर
ले असला अपनी बाहों में

गोलियों की बरसात में
वो लाल लहू से नहाते हैं
होली हो या दिवाली हो
सब सीमा पर ही मनाते हैं

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जो पल भर में धुल जाती है
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सर कटा सकते हैं लेकिन
सर झुका सकते नहीं
फिर खून खौल सा जाता है
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वो घुंट लहू का पीते हैं
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घर पर लाई जाती है
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सलाम ना आया

सलाम ना आया (PDF)




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