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Showing posts from November, 2016

बस स्टैंड

शाम के 6 बज चुके थे और घनघोर बारिश ने सड़क को नदी में बदल दिया था. मैं बस स्टॉप पे खड़ा अपनी बस के इन्तजार में था. उसी बीच आस पास कुछ ऐसा माहौल था. 
"लोगो को अपनी टाट पर हाथ रख कर भागते देखना अपने आप में अनोखा अनुभव होता है. और तेज गति से जाती गाड़ी से उडती छीटे जब किसी के वस्त्रो को भीगा दे. तब उस सज्जन पुरुष के मुख से गाड़ी वाले के प्रति निकलते सांस्कृतिक शलोको को सुनना भी काफी सुकून दे होता है. और भीगी भीगी सडको पर हाथ में छाता लिए जाती बालाओं को देखना तो ठीक उसी प्रकार होता है जैसे इंद्र लोक में अप्सराओं का नृत्य चल रहा हो."


हां तो मैं बस का इंतज़ार करते करते परेशान हो गया. मन हुआ की अभी ऑटो कर के निकलू तभी एक सुंदर बाला पीछे आकर खड़ी हो गयी और वो भी बस का इंतजार करने लगी. फिर मैंने ऑटो ना करने का फैसला लिया और कानो मे लीड ठूस कर गाना लगा दिया “ एक लड़की भीगी भागी सी – सोती रातो में जगी सी “ और फिर से शुरू कर दिया आस पास के माहौल का आनंद लेना.
अब काफी देर हो गयी और दिमाग में दर्द शुरू हो गया. घंटा हो गया रात भी होती जा रही है पता नहीं बस कंहा मर गयी कम्बखत. और फिर से शुरू कर दिया…