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Showing posts from December, 2016

भड़कता शोला - 2016

चलो भाई जिन्दगी के एक और साल की शाम हो चुकीं है

बोहोत से नये दोस्त - बोहोत सी यात्रा - बोहोत से नये तजुर्बे - बोहोत सी सीख  के साथ इस साल में बोहोत कुछ ऐसा था जिसे सारी उम्र नहीं भुलाया जा सकता. वैसे तो बोहोत से वाक्यात रहे जिनका जिक्र किया जा सकता है पर अभी के लिए वो चुनिन्दा चीजे जो वाकई में खास रही.
जब आपके माँ बापू जी एक नंबर के हो तो जिन्दगी बहुत आसान हो जाती है.
दक्षिण भारत में यात्रा का दौर जरी रहा रामेश्वरम, कन्याकुमारी,तिरुमाला तिरुपति , तिरुवनंतपुरम जैसे जगहों के दर्शन हुए.
मेरा सपना या कहे शौक सा था की मेरी खुद की कोई वेबसाइट हो तो इस साल वो भी पूरा कर लिया. जिसमे अपने प्रोडक्शन हाउस में बने विचारो को डाला जाता है. अगर किसी भाई को देखना हो तो लिंक है www.rajabetaxclusive.com
इसरो के चेयरमैन सर से मिलने का मौका मिला तब उन्होंने एक वीडियो दिखाई जिसमे कर्नाटका के किसी दूर दराज के गाँव के छोटे बच्चो ने मंगलयान का simulation बनाया था. साथ बैठ के चाय पीने में तो माँ कसम राजा महाराजा वाली फीलिंग आ रही थी.
त्योहारों के हिसाब से दक्षिण भारत में कोई खास रंग नहीं रहते कम्बखत पता ही नहीं लगता…

राजधानी xpress

प्राचीन काल की बात है मुझे ट्रेनमें दिल्ली से बंग्लौर जाना था. हाथ में टिकेट लिए देख रहा था कौनसा डब्बा है अपना और दिल में उम्मीद लिए की आस पास वाले घंटू ना निकल जाये मैं डब्बे डब्बे की ठोकरे खा रहा था. फिर अपन ट्रेन में अपलोड हो गए. ट्रेन चलना शुरू हुई और मैंने अपने राष्ट्रीय वस्त्र निक्कर टी-शर्ट धारण कर लिए. अब अपनी तो सबसे ऊपर वाली सीट थी जिससे ऊपर छत होती है और उससे ऊपर भगवान . फिर मैंने फ़ोन उठाया और सारी दुनिया को बताना सुरु कर दिया की ट्रेन चल पड़ी.
ट्रेन की खिड़की पर बैठे कान में लीड घुसेड बहार के नज़ारे लेने की आस. आस ही लगती दिख रही थी. चलो कोई ना देखी जायगी और ट्रेन की छत देखते हुए प्राचीन से भी प्राचीन काल के गीत सुनते हुए कब मेरे नयन सो गए पता ही नहीं चला.

अचानक से किसी अनजान मनुष्य ने मेरे हाथो को छुआ और कहने लगा
“ सूप लेलो सर “
तो साले डरा क्यों रहा है बे और मैं सोच रहा था की “ मैं आखिर हूँ कहा “
अब आस पास की सीट भी भर चुकी थी . और कुछ लौंडे अंग्रेजी भासा का जोर जोर से उचारण कर रहे थे. और कुछ कन्या उनकी बातोँ पर अपने दन्त मसुडो का प्रदर्शन कर रही थी
पर मेरा कंसंट्रेशन कही और ही…

सलाम ना आया

सलाम ना आया (PDF)




थी गुफ़्तगू इक आने के उसकी ढल चला आफताब पर पैगाम ना आया
चढ़ा था सुरूर मय खाने में थे हम पर सदियों से प्यासों का वो “जाम” ना आया
खड़े थे कुचे में इक झलक ऐ दीदार को वो आये नज़र मिली पर सलाम ना आया
मिली बदनामिया और मिली शौहरते पर हसरतों वाला दिली मुकाम ना आया
उसका था शहर और उसकी अदालते हम हुए हलाक उसे इल्जाम ना आया
“दीप” हुआ बदनाम सारे इस जंहा में  पर उस बेवफा का कही नाम ना आया
प्रदीप सोनी 

Life @ MRK

इस पोस्ट का मकसद किसी भी तरह से कॉलेज की प्रशंसा या बुराई करना नहीं है. ये पूर्ण रूप से व्यक्तिगत विचार है अगर ये विचार किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु के विचारों से मेल खाते है तो उसे महज संयोग और मेरा दोस्त कहा जायगा.
हरियाणा के दक्षिण में बसे शहर रेवाड़ी से 7 किलोमीटर दूर खेतो के बीचो बीच उगे इस कॉलेज को “ MATA RAJ KAUR INSTITUTE OF ENGINEERING & TECHNOLOGY “ नाम से जाना जाता है.बनावट के हिसाब से ठीक ठाक ज़बरदस्त, स्टाफ के हिसाब से भी कुल मिला के बढ़िया. सुविधाओं के लिहाज से अच्छा कहा जा सकता है. खेतो के बीच में बसे होने के कारण लडको को कॉलेज से फरार होकर पिक्चर देखने जाने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है. कभी कभी तो कॉलेज से भागे लड़के ऑटो ना मिलने की वजह से वापिस कॉलेज ही आ जाते है. कॉलेज की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा हरयाणा के बहार के लौंडो का भी होता है. जो थोड़े दिन में हरयाणवी बोलते देखे जा सकते है. अब काफी लोगों के मन में सवाल आया होगा की लड़कियाँ कैसी है भाई तो अपना जवाब है जैसा देखने वाला देखे. बाकि अपन को तो कोई खास लगी नहीं.


अब सब सोच रहे होंगे के ये सब क्यों बताया जा रहा है तो लिजीये …

अलविदा अम्मा

कल रात से ही माहौल गरमाया हुआ था और लोग हॉस्पिटल के सामने, सडको पर और जंहा जगह मिल जाये वंही भगवान को मानाने में लगे हुए थे. पर इस बार ऐसा लग रहा था की भगवान नहीं मानेंगे मगर लोग तो बिचारे भोले भाले होते है.
आज सुबहे 5 बजे अलार्म बजा तो देखा की टीवी चल रहा है और साथ वाले पलंग पर लेटे लातिश भाई बोले “ AMMA NO MORE YAAR”. मुझे लगा की लातिश भाई भी अम्मा के हार्डकोर फैन है. वैसे भी अपन को या कहे की सभी को पहले से ही आईडिया हो गया था की ज्यादा टाइम है नहीं अम्मा के पास. आज सारा दिन चर्चा का मुद्दा रही अम्मा टीवी, लोग, सड़क जहा देखो अम्मा ही अम्मा हो रही थी. मुझे तमिल नाडू का राजनीती तंत्र अजीब या कहे व्यक्ति केन्द्रित लगता है यहाँ के लोग राजनेताओ को भगवान का दर्जा देते है. नेताओ द्वारा अम्मा के पैर छूने की बात तो जग जाहिर है. कहा जाता है की शादी के टाइम लोग जयललिता जी की बड़ी सी मूर्ति आशीर्वाद देते हुए लगते है जिसमे हाथो से अम्मा फूल बरसाती है. मतलब अम्मा को भगवान का दर्जा है.


कुछ लोगो के साथ हुई बाते आप लोगो से साझा करता हूँ ये लोग तमिल नाडू के निवासी या वंहा से तालुक रखते है: 
अम्मा ने गरीबो …