अलविदा अम्मा

December 06, 2016

कल रात से ही माहौल गरमाया हुआ था और लोग हॉस्पिटल के सामने, सडको पर और जंहा जगह मिल जाये वंही भगवान को मानाने में लगे हुए थे. पर इस बार ऐसा लग रहा था की भगवान नहीं मानेंगे मगर लोग तो बिचारे भोले भाले होते है.

आज सुबहे 5 बजे अलार्म बजा तो देखा की टीवी चल रहा है और साथ वाले पलंग पर लेटे लातिश भाई बोले “ AMMA NO MORE YAAR”. मुझे लगा की लातिश भाई भी अम्मा के हार्डकोर फैन है. वैसे भी अपन को या कहे की सभी को पहले से ही आईडिया हो गया था की ज्यादा टाइम है नहीं अम्मा के पास.
आज सारा दिन चर्चा का मुद्दा रही अम्मा टीवी, लोग, सड़क जहा देखो अम्मा ही अम्मा हो रही थी. मुझे तमिल नाडू का राजनीती तंत्र अजीब या कहे व्यक्ति केन्द्रित लगता है यहाँ के लोग राजनेताओ को भगवान का दर्जा देते है. नेताओ द्वारा अम्मा के पैर छूने की बात तो जग जाहिर है. कहा जाता है की शादी के टाइम लोग जयललिता जी की बड़ी सी मूर्ति आशीर्वाद देते हुए लगते है जिसमे हाथो से अम्मा फूल बरसाती है. मतलब अम्मा को भगवान का दर्जा है.



कुछ लोगो के साथ हुई बाते आप लोगो से साझा करता हूँ ये लोग तमिल नाडू के निवासी या वंहा से तालुक रखते है: 

अम्मा ने गरीबो के लिया बोहोत कुछ किया है भाई जैसे

  •  1 रुपे में इडली 5 रुपे में भर पेट खाना
  • 3-5-7 रुपे बस का किराया 
  • गरीब लडकियों की शादी में मदद ( टीवी , मिक्सी , पलंग आदि )
  • बड़े लोगो को पेलकर गरीबो में बाटना ( बोले तो रोबिन हुड स्टाइल )

एक बार मेरे खास दोस्त ने कहा था:

 “ अरे भाई चेन्नई में असली मजे थे हर चीज़ फ्री बराबर होती है यहाँ (बंगलौर) तो हगने के भी 10 रुपे ले लेते है “

अम्मा ने हमे उसुलो की लड़ाई में ये बाते सिखाई

  • ·         अभीनेत्री से नायिका बनना और बने रहना.
  • ·         अपने दम पर पूरा प्रशासन चलाना.
  • ·         सबसे बड़ा काम लोगो के दिलो में घर करना.
  • ·         लोगो के हक़ के लिए लड़ना फिर चाहे वो केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारे. 

कुछ बाते जानने के बाद लगने लगा है की हां अम्मा में कुछ तो खास बात थी वरना इतना लोगो का हुजूम तो तब भी ना हुआ जब आदरणीय कलाम जी रवाना हुए थे जितना आज जयललिता जी की विदाई पर था.

राष्ट्रीय स्तर पर बेशक उनकी छवि उतनी साफ़ नहीं है पर लोगो ने अम्मा के काम को सराहा और आज मुझे भी लगा की हां कुछ तो बात थी आंटी में जो लोग जान देने को आगे रहते है. बाकि मुझमे भावुकता अभी भी आस पास नहीं. पता नहीं क्यों...???




भगवान झूठ ना बुलाए पर अब तो कोई भी रवाना होता है तो मन में कबीर की ये पंक्तिया दौड़ जाती है.

"चलती चक्की देख कर, दिया कबीरा रोय
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा ना कोई" 



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