सलाम ना आया

December 15, 2016





थी गुफ़्तगू इक आने के उसकी
ढल चला आफताब पर पैगाम ना आया

चढ़ा था सुरूर मय खाने में थे हम
पर सदियों से प्यासों का वो “जाम” ना आया

खड़े थे कुचे में इक झलक ऐ दीदार को
वो आये नज़र मिली पर सलाम ना आया

मिली बदनामिया और मिली शौहरते
पर हसरतों वाला दिली मुकाम ना आया

उसका था शहर और उसकी अदालते
हम हुए हलाक उसे इल्जाम ना आया

“दीप” हुआ बदनाम सारे इस जंहा में 
पर उस बेवफा का कही नाम ना आया

      प्रदीप सोनी 


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3 comments

  1. bahut khoob likha hai apne.
    http://sabhindime.com/krishana-love-shayari-messages-hindi/

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    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया कलावती जी .... :)
      कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाए.

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