मामा

January 23, 2017


ये वो जमाना था जब दसवी में बोर्ड के पेपर हुआ करते थे. खैर होते तो आज भी है पर उस ज़माने में खौफ इतना था की जैसे अगर नंबर कम आये तो फ़ासी हो जायगी या अमरीका परमाणु बम गिरा देगा या फिर राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बन जायगा. अक्टूबर का महिना आ चूका था और स्कूल वालो ने कहा की “ सब बच्चे अपनी पासपोर्ट साइज़ फोटो सोमवार तक जमा करा दो CBSE को भेजनी है.


तब हमारा एक दोस्त था चंदर मतलब चंदर  और बच्चे प्यार से उसे मामा बुलाते थे.” तेरे “ नाम देखने के बाद मामा को बड़े बाल रखने का शौक हुआ. और थोड़े दिनों में जुल्फे में सलमान के तेरे नाम की तरह लहराने लगी. और जब स्कूल की छुट्टी के बाद मामा  अपनी लेडीज साइकिल पे घर जाये तब नजारा ही अलग होता था. लडकिया तो लडकिया लौंडे भी उसे मुड मुड के देखे.


तब सारे दोस्तों ने सोचा की आज शाम को चलते है रूबी ( फोटोग्राफर ). तब शाम को सब अपनी अपनी लम्बोर्गिनी लेकर चल पड़े.  मेरी लम्बोर्गिनी की चैन बार बार उतर जाती इसलिए सभी मेरी प्यारी लम्बोर्गिनी को खटारा कह रहे थे मुर्ख प्राणी. रूबी के बहार बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ था. “ 50 रुपे में 50 पासपोर्ट साइज़ फोटो  2 मिनट में”.

वंहा पहुचते ही देखा की हमारी क्लास की एक बाला कुर्सी पर बैठी इंतजार कर रही थी फोटो मिलने का. तब वो जमाना था जब शर्म अपने चरम पर हुआ करती और लड़के - लड़की का बात करना गुनाह और गलती से कोई कर ले तो उसकी पढाई बंद करने का फरमान घर से आ जाता. वैसे ये लाइन थोड़ी ज्यादा हो गयी पर फिर भी एडजस्ट कर लो. तब सब जाकर उस भाई से जो कंप्यूटर पे बैठा कुछ कर रहा था  बोले “ भईया पासपोर्ट फोटो खीच दो सबकी “

तभी अचानक पर्दा हटा और एक अंकल अपनी मुंडी बहार निकलकर भारी से स्वर में बोले “ एक एक करके आ जाओ सारे  “
अब फोटो खिच चुकी थी और सारे लौंडे बहार खड़े बच्क्चोदी कर रहे थे. पर वो बाला अभी तक वही बैठी थी पता नहीं क्यों. तब सब लौंडो की फोटो तैयार हो गयी और आवाज़ आई “ अरे फोटो ले जाओ भाई “


हम सब फोटो ले चुके थे और जाने को तैयार थे. मैंने तो अपनी साइकिल की चैन भी चढ़ा ली थी.  पर फोटू वाले भईया को एक सवाल खाए जा रहा था उन्होंने  हमारे  मामा को समीप बुलाया और भरी महफ़िल में पूछ ही लिया “ भाई छोरा है या छोरी “ और ये सुनते ही हर तरफ लोग दहाड़े मार मार के हसने लगे जैसे उनको कोई फ्री बर्गर खिलायगा हंसने के लिए. और मैंने देखा के वो बाला भी मुंह नीचे करके हंस रही थी. बिचारे मामा का तो चमत्कार हो गया था.


पर एक सवाल की वो बाला वंहा क्यों बैठी रही इसका जवाब एक साल बाद मिला की वो अपने बाप का मतलब पापा के इंतजार कर रही थी.
  



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