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Showing posts from April, 2017

यारी

यारी
पीठ पे वार से  अपनो की मार से  बेईज्ज़ती भरे बाजार से  इंसान घुट घुट मरता है 

लत शराब की भारी ने बढती उम्र बिमारी ने ना मुराद बेरोजगारी ने कई बर्बाद कर दिये

कंजूस के हाथ में  दगाबाज के साथ में  फिजूल की बात में  कुछ नहीं मिलता 

एक तरफा प्यार से धोखेबाज यार से और बेगानी नार से  बच के रहना चाहिए

बापू की सरदारी में  नौकरी सरकारी में  और "दीप" की यारी में  मजे ही ओर है

प्रदीप सोनी 

मंगलवार और मंदिर

" अरे यार  गोपू आज का मैच तो हरवा दिया यार मोटा सेंटर लग जाता है और जो भी बोल आये सीधा बहार मार दे और वो लम्बू नेटर की औलाद सारी बोल नेट में ही दे मारे. खामखा हरवा दिए आज."






अंकल 11 रुपए का दो जगह  गरमा गरम प्रसाद दे दो
मैं: अरे यार आज तो बड़ी लंबी लाइन है  थोड़ा लेट हो गए अपन गोपाल: हा यार

यह वाकया है उन दिनों का जब हम स्कूल में हुआ करते थे तब मैं और मेरा दोस्त गोपाल अक्सर हर मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर जाया करते. तकरीबन 7:00 से 7:30 के बीच में हम लोग हनुमान जी से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगने पहुंचते. लाइन अक्सर लंबी हुआ करती क्योंकि पाप धोने के लिए बहुत से प्रसाद नाम का साबुन लिए खड़े रहते.

बड़े सालों से चल रहा है हमारा यह सिस्टम

मैं: अरे गोपाल वह देख अपनी क्लास की मोटी गोपाल: अरे हां भाई मैं: देखना  जरूर देखेगी गोपाल: ना  देखा यार मैं: कोई ना भाई तु मन मत मार और लड़कियां दिखाऊंगा  मेरे भाई को टेंशन मत ले तू. गोपाल: अरे पागल है क्या यार अपन मंदिर आये हैं भगवान पाप देंगे लड़कियों को मत देखा भी भगवान को याद कर बस मैं: सही कह रहा है भाई तू तूने तो मेरी आँखे खोल दी " जय हनुमान …

पेपर और धक्के

सर्दियों ने भी जुल्म किया हुआ है कम्बखत दिन निकल कर कब रात हो जाती है अँधेरे अँधेरे में कुछ पता ही नहीं लगता ऊपर से पेपर की चिंता अलग. बिलकुल ऐसा लगता है जैसे बर्फ की सिल्ली पर लेटकर बेल्ट मारी जा रही हो. वो तो सभी को पता ही है कहा मारी जाती है. यार कल सुबह पेपर है और पढ़ा भी कुछ नहीं और उससे भी बड़ी टेंशन कल पेपर के टाइम तक कॉलेज पहुंचेगे भी या किसी मोड़ पे खड़े होकर लिफ्ट मांगते घूमेंगे. कोहरे की वजह से बस लेट हो जाये, आँख ना खुला और सौ बात. इन्ही खयालो ने ही मुझे और टीटू को 10 मिनट के अन्दर बस स्टैंड पंहुचा दिया. मैं और टीटू हाथ में झोला लिए बस स्टैंड पे झज्जर वाली बस के सामनेखड़े थे. तो भाई मौसम बड़ा ही सुहाना सा था एकदम आसमान काली घटाओ से घिरा हुआ मंद मंद सर्दी. बोले तो सेक्सी मौसम. हिंदी फिल्मो में जिसे बेईमान मौसम कहा जाता है. “ सीटी बजी “ "चलो भाई सारे बैठ लो चल पड़ी बस." अब भईया अपनी बसों में ये रुल था की अगर बस के अन्दर बैठ के गए तो 25 रुपे किराया और छत पर बैठ कर गए तो 15 रुपे किराया. तब मैंने और टीटू ने दिमाग लगाया की छत पर ही चलते है यार 10 – 10 रुपे बचेंगे उतर के समोसे ख…