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Showing posts from June, 2017

सोशल मीडिया के फायदे नुकसान

अंतरराष्ट्रीय मोह मायाWhatsApp - Facebook - Instagramसे बौखला कर मैंने अपना पर्सनल प्रयोग किया. जिसमेंमेरा मकसद 21 दिनबिना मोह माया में पड़ेगुजारना था.जिसमें WhatsApp Facebook और Instagram से दूर रहना था और जैसे कि उम्मीद थी सफलतापूर्वक 21 दिन प्रयोगपूरा करने के बाद परिणाम कुछ इस प्रकार रहे.
सोशल मीडिया के साथ आम दिन
1. आँख खुलते ही facebook whatsapp चलाया फिर सो गए. 2. मोबाइल पकडे संडास में गए और 1 घंटे बाद वापस आये. 3. बाजार जा रहे है मोबाइल हाथ में. 4. खाना खा रहे है मोबाइल हाथ में. 5. टट्टी कर रहे है मोबाइल हाथ में. 6. बड़ो से बात कर रहे है मोबाइल हाथ में. 7. और रात के 12 बज गए मोबाइल हाथ में.
21 दिन के प्रयोग के बाद
बदलाव 1.  कल तक फूलों से भरा बाग लगने वाला मोबाइल बंजर रेगिस्तान लगने लगा. 2. खाना खाते हुए बिना मोबाइल ऐसे लगता जैसे खाने में नमक कम हो. 3. रास्ते में जाते हुए पता लगताहै अच्छा यह दुकानकैसे आई पहले तो नहीं दिखी कभी. 4. बिना सोशल मीडिया के ऐसा लगता जैसे किसी ने आत्मा को बोतल में बंद कर दिया हो. 5.  लगता की मेरे फेसबुक के दोस्त मेरे लिए तड़प रहे होंगे. 6. घर वाले भी पूछ लेते हैं क्या बा…

लम्बी दूरी के मुसाफिर

"जिस नंबर पर आप बात करने का प्रयास कर रहे है वो अभी बंद है कृपया थोड़ी देर बाद फिर से प्रयास करे"  ये 20 वा फोन मिलाया था बिट्टू ने और जवाब हर बार की तरह स्विच ऑफ वाली आंटी दे रही थी. पहले कभी फोन करने पर वो नंबर स्विच ऑफ नहीं मिला पर आज तीसरा दिन हो चला है.
बिट्टू के दिमाग में खयालो की सुनामी आई हुई है. और उसका माथा खिसक चूका है. ख्याल ये भी आ रहे है की मैं कभी फोन ना करू इसलिए उसने सिम ही ना तोड़ फेकी हो. और दौड रही है वो सारी बाते जो जो पिछले चार साल में उन दोनों के दर्मिया हुई है. पहले इतनी शिद्दत से बिट्टू ने कभी उसे इतने फोन नहीं किए मगर ना जाने आज क्यों इतनी बचैनी है. उसकी आँखे ऐसे फडक रही है जैसे कोई प्रलय आने वाली है.

तभी बिट्टू ने फ़िल्मी स्टाइल में अपना फोन निकला और मोबाइल स्क्रीन पर ऊँगली मार कर फसबूक चलाया और लिखने लगा नाम उसका सर्च बॉक्स के डब्बे में और पहले नंबर पर आये उस नाम को उसने अंगूठा मार कर दबाया. “This account is temporarily deactivated”  फसबूक चाचा ने कहा. अब बिट्टू हर जगह से उम्मीद हार चूका था उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की अब क्या करे. फिर वो गली के खोप्चे…

ऐ मेरे खुदा

ऐ मेरे खुदा (PDF)
जा बैठा जो अम्बर पर तू क्यों नजरो से बचता है कही बेच ना  दे बाजारों में क्या तू इंसा से डरता है ऐ मेरे खुदा जरा सामने आ मुझे कुछ बात करनी है


वो खेतो में जो तपता है दिन रात ही  मेहनत करता है औरो का जो पेट भरे वो खुद क्यों भूखा  मरता है ऐ मेरे खुदा जरा सामने आ मुझे कुछ बात करनी है



वो सीमा पर जो लड़ता है क्यों बिन आई पर मरता है जैसे अम्बर से टूटे तारा क्यों चढ़ता सूरज ढलता है ऐ मेरे खुदा जरा सामने आ मुझे कुछ बात करनी है


इस बदनसीब गरीबी में क्यों खेल निराले होते है जंहा इज्ज़त तक भी बिक जाती यहाँ  दिन क्यों काले होते है ऐ मेरे खुदा जरा सामने आ मुझे कुछ बात करनी है

जो सच की सीढ़ी चढ़ता है वो दुनिया से क्यों लड़ता है इस इज्ज़तदार ज़माने में ये सच क्यों भारी पड़ता है ऐ मेरे खुदा जरा सामने आ