लम्बी दूरी के मुसाफिर

June 02, 2017


"जिस नंबर पर आप बात करने का प्रयास कर रहे है वो अभी बंद है कृपया थोड़ी देर बाद फिर से प्रयास करे"  ये 20 वा फोन मिलाया था बिट्टू ने और जवाब हर बार की तरह स्विच ऑफ वाली आंटी दे रही थी. पहले कभी फोन करने पर वो नंबर स्विच ऑफ नहीं मिला पर आज तीसरा दिन हो चला है.

बिट्टू के दिमाग में खयालो की सुनामी आई हुई है. और उसका माथा खिसक चूका है. ख्याल ये भी आ रहे है की मैं कभी फोन ना करू इसलिए उसने सिम ही ना तोड़ फेकी हो. और दौड रही है वो सारी बाते जो जो पिछले चार साल में उन दोनों के दर्मिया हुई है. पहले इतनी शिद्दत से बिट्टू ने कभी उसे इतने फोन नहीं किए मगर ना जाने आज क्यों इतनी बचैनी है. उसकी आँखे ऐसे फडक रही है जैसे कोई प्रलय आने वाली है.


तभी बिट्टू ने फ़िल्मी स्टाइल में अपना फोन निकला और मोबाइल स्क्रीन पर ऊँगली मार कर फसबूक चलाया और लिखने लगा नाम उसका सर्च बॉक्स के डब्बे में और पहले नंबर पर आये उस नाम को उसने अंगूठा मार कर दबाया. “This account is temporarily deactivated”  फसबूक चाचा ने कहा. अब बिट्टू हर जगह से उम्मीद हार चूका था उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की अब क्या करे. फिर वो गली के खोप्चे में बनी पनवाड़ी की दुकान पे गया और एक बड़ी क्लास्सिक लेकर फ़िल्मी स्टाइल में उसे याद करते हुए पीने लगा. उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था की कैसे वो इनता बेपरवाह हो सकता है. कैसे वो बिना बात उसे भला बुरा कह सकता है. उसकी एक एक शिकायत बिट्टू को अंदर ही अंदर जला रही थी.

तभी बिट्टू का पुराना नोकिया बजा और कॉल किसी अनजाने नंबर से थी.

बिट्टू ने फोन उठाया

बिट्टू: हेल्लो (सहमे हुए)
वो: हेल्लो बिट्टू
बिट्टू: हाँ (सहमे हुए)
वो: नमस्कार सर मैं आईडिया से प्रीती क्या आप अपनी सिम पोस्टपैड करना चाहेंगे.
बिट्टू : तेरी बहन की ...... ( मन ही मन ) नहीं मैडम और आगे से इस नंबर पर फोन मत करना       (बिट्टू ने कहा)

फोन काट कर बिट्टू फिर से फ़िल्मी स्टाइल में सिगरेट पीने लगा और ढूंढ रहा था उसे अपने खयालो में 

तभी फिर से उसके नोकिया की घंटी बजी और वो भी अनजान नंबर था.

बिट्टू: हेल्लो
वो: .......
बिट्टू : हेल्लो कौन .... ???
वो: ........
बिट्टू : पूनम ... ???
पूनम : आज शाम को जा रही हूँ साथ एयरपोर्ट चल सकते हो ... !!!
बिट्टू : कहा हो अभी
पूनम : घर
बिट्टू : ठीक है आता हूँ.

तभी बिट्टू अपना खटारा स्कूटर लिए निकल पड़ा बंटी के घर जहा से पूनम का घर 5 घर छोड कर ही है. और वह पहुच कर पूनम को फोन किया

बिट्टू : मैं आ गया हूँ
पूनम : ठीक है ... 10 मिनट

बिट्टू बंटी की बालकनी से देख रहा था की आखिर चल क्या रहा है पूनम के घर. और एकदम से हाथ मैं भारी भरकम बैग लिए एक नवयुवक निकला. “अरे ये तो साले साहब है” बिट्टू ने कहा.
और कुछ ही देर में भावुक होने का कार्येक्रम शरू हो गया और पूनम की माँ ने किसी तरह आसू रोक कर पूनम को विदाई दी और वो गाड़ी में बैठ कर निकल पड़ी. और गाड़ी जाते ही माँ के छिपे बैठे आसू निकल पड़े. जिसे दिख बिट्टू भी रोने को हो गया.

तभी बिट्टू का फोन बजा

पूनम: समोसे की दुकान के सामने आ जाओ.
बिट्टू : आता हूँ

और वो बैठ कर एअरपोर्ट के लिए निकल पड़े

पूनम : समझते क्या हो तुम अपने आप को. अगर कोई ज्यादा कदर करता है तो खुद को भगवान समझते हो बिट्टू मैंने जितनी तुम्हारी कदर करी है इतनी शायद किसी ने नहीं की होगी. पर इसे तुम्हे क्या फर्क पड़ेगा तुम्हे तो फ्री मैं चिंता करने वाली मिल रही है. सारी गलती मेरी ही थी मैंने ही तुम्हे सर पर चढा रखा था. चलो ठीक है अब जी लेना अपनी जिंदगी अपनी बेपरवाही.

बिट्टू: .... ( चुप चाप सुन रहा है )

पूनम: जानते हो मैं तुम से बिल्कुल मिलना नहीं चाहती थी और मिटा देना चाहते थे तुम्हे मेरे इतिहास से पर ना जाने आज क्यों ये दिल पिंघल गया. और हो सकता है ये हमारी आखरी मुलाकात हो.

बिट्टू: ...... ( बिट्टू सुन रहा है और लग रहा है की जो पूनम कह रही है जैसे सब सच है )


और इसी तरह पूनम का रेडियो चालू रहा और बिट्टू एकदम श्रोताओ की तरह सब सुनता रहा और चू भी नहीं बोला वही पूनम ने पिछले चार सालो का हिसाब किताब बिट्टू को बता दिया.


 

अब शीशो से बनी वो ईमारत आ चली थी जहाँ से लंबी दूरी के मुसाफिर जाते है जिसमे पूनम भी एक थी.

बिट्टू: चाय पिएगी
पूनम: पहला प्यार है ना तुम्हारा चाय चलो पीते है.
बिट्टू: माना मैं बेपरवाह हूँ और मैं नहीं कर सकता दूसरों की तरह जानू जानू और मुझे घंटा भी पता नहीं प्यार करने का सलीका पर पूनम “मेरा प्यार सच्चा था” और हो सके तो मुझे माफ कर देना.
पूनम: ..... ( सुन रही है आंखो में नमी लिए )

हाथ में बैग लिए दोनों एअरपोर्ट के गेट पर जाते है पर ना जाने क्यों बिट्टू को वो 20 किलो का बैग टन से भी भारी लग रहा है उसे ऐसा लग रहा है जैसे उसके शारीर से आत्मा निकली जा रही है. और वो गेट पर पहुँच गए.

बिट्टू: चल ठीक है पूनम लूट तू भी अमरीका की मौज. पर कभी याद मत करियो हाथ जोड़ के रेकुएस्ट है मेरी ( मुस्कुराते हुए बिट्टू ने कहा )

और पूनम आंखो में घनघोर बादल लिए चली गई लंबे सफर पर

बिट्टू अधूरा अधूरा सा घर लौट रहा था और पूनम की कही बाते दिमाग में घंटे कि तरह बज रही है.



बिट्टू मदिरा पान के बाद गिरता पड़ता कमरे में घुसा और सामने खड़ी अलमारी पर एक जोरदार मुक्का बरसा दिया और पास पड़े फोन को दे मारा झुल्फे सवारने वाले शीशे पर और सो गया वो गहरी काली रात में कुछ अधूरा अधूरा सा ..... और बहार निकले एक चाँद को शीशे के टूटे टुकड़े हजारो चाँद दिखा रहे थे.

बस इतनी सी थी ये कहानी 

हवा में प्रणाम





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