करनी का फल



वो दोनों साइड टायर लगी एक्टिवा दुकान के सामने आकर खड़ी हुई. उन भाई साहब को टायर बदलवाना था. वो अपने हाथ में छड़ी का सहारा लेकर आये और मेरे पास बैठ गए. छोटू भी टायर डालने लगा 

तब उसने बातचीत शुरू हुई और बातचीत तक़रीबन 1 घंटा चली. और बड़े दिल से उन्होंने एक एक बात बताई जो की कुल मिला कर ये थी. 

“ भाई मैं टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च से पढ़ा हूँ. यहाँ पड़ोस में मेरा गाँव है. पहले मैं दिखने में भी लम्बा चौड़ा गबरू था. स्टेट लेवल बॉक्सिंग खेल चूका हूँ. पढाई में भी हमेशा फर्स्ट आया करता. किसी को मैं अपने बराबर नहीं समझता. एक लड़की थी हमारे TIFR बैच में बहुत परेशान किया उसको. वो हमेशा मुझे बदुआ दिया करती थी. पढाई के बाद मैंने अपना काम शुरू किया और महीने का लाखो रुपे कमाने लगा. अपने साथ काम करने वालो को भी कुछ नहीं समझता सब मेरे लिए बदुआ मांगते थे. और छोटे भाई आज 2 साल हो चुके है मैं बिना छड़ी के चल नहीं सकता और डॉक्टर कह रहे है ठीक होने में और 3 साल लगेंगे और मुझे पता है मैं पहले जैसा कभी नहीं हो पाउँगा. मुझे पता है भाई ये मेरे कर्मो की सजा मिल रही है. घमंड बहोत था मुझे अपने ऊपर”  

उन्होंने जाते टाइम एक बात कही “ भाई करनी का फल भुगतना ही पड़ता है ”

 भईया का एक्सीडेंट हो गया था और आज तक किसी ने खुद के बारे इतनी सच्चाई से खुद की बुराई या कहे तो अपनी हकीकत नहीं बताई.

हवा में प्रणाम

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