नन्दी हिल्स ( बेंगलुरु )

July 14, 2017


सुबह के करीब करीब 2 बज चुके थे अलार्म बजा और अपन सनूज कर के फिर सो गए. पाच मिनट बाद फिर अलार्म बजा और फिर सनूज और फिर बजा फिर सनूज. तीन बजे तक ये सिलसिला जारी रहा फिर दिमाग ने हेवी सिग्नल भेजने शुरू किये की अब ज्यादा हो रहा है फिर शारीर में शक्ति का संचार हुआ और हिम्मत करके अपन बाथरूम तक पहुंचे और नाहा धो कर आधे घंटे में बाइक के ऊपर.




आज हम लोगो ने बंगलोर से 60 किलोमीटर दूर बसी एक छोटी सी पहाड़ी नंदी हिल्स पर भीड़ करने का प्रोग्राम बनाया था. करीब 3:30 पर मौसम ठंडा ठंडा कूल कूल था और आसमान में अँधेरा. तब दोस्तों को फोन मिलाया और बेडा तैयार किया. साथ जा रहे भाई ने तो पिछले ही दिन गली वाले कुत्ते से लड़ाई की थी.हाथ पर चोट के निशान दिखा रहा था.




 बंगलोर की खाली सुनसान सड़के कितनी हसीन लगती है इसका अंदाज तो हमे आज ही हुआ. निकल पड़े थे हम अपनी मंजिल की ओर सर्दी, खाली सड़के और कुछ हद तक अनजानी रहे सुबहे सुबहे कितना अच्छा मौसम बन गया. इस तरह के माहौल में हर लौंडा चाहता है की हाथो में बुलेट हो पीछे सुंदर शुशील कन्या बैठे और जाये अपना बुलेट सड़क को हिलाते हुए. पर कई बार हालात ऐसे होते है की किसी भाई के साथ पैशन प्लस पे जाना पड़ता है.

 घुमने का असली मजा तो लौंडे लोगो के साथ ही होता है 



करीब 2 घंटे के सफ़र के बाद हम लोग उस एंट्री गेट पर आ पहुंचे थे जहा से आगे तब तक नहीं जा सकता जब तक गेट ना खुले और गेट खुलने का टाइम सुबहे 6 बजे होता है अगर आप जल्दी आ पहुंचे तो कोई बात नहीं अपनी गाड़ी खड़ी करके ऊपर वाली चाय की दुकान पर चाय पी सकते है


 और अगर आपको लगता है की आपकी गाड़ी चोरी हो जायगी तो कोई नहीं वही खड़े रहकर लोगो को हरकते देख सकते है अपनी ही तरह के भिन्न भिन्न तरह के बहुत से प्राणी देख सकते है. गेट खुलते ही लोग गाड़ी लेकर ऐसे भागने लगे जैसे प्रेशर में आया इन्सान बाथरूम की तरफ भागता है.



 कुछ लोगो ने तो हॉर्न मार मार कर कान में दर्द कर दिया. “अपन ने भी मुड़ के पूछ ही लिया उडके जाये गा क्या भाई” और इसी के साथ हम लोग चोटी की तरफ भड्ने लगे. गोल गोल चढ़ाई पर बाइक चलाने पर ठीक वैसे ही फीलिंग आ रही थी जैसे MOTO GP रेस का में ही ड्राईवर हूँ. पर बाइक को देख कर लग रहा था जैसे मन ही मन ये भी पूछ रही हो “ क्या चाह रहा है भाई “  और इस तरह हम पार्किंग स्पॉट पर आ पहुंचे.



 सामान्य ज्ञान के लिए बता दू  की पार्किंग फीस 25 रुपे थी और अगर आप अपने साथ DSLR, SLR या कोई सा भी R कैमरा ले जा रहे है तो आपको 50 रुपे का एक टिकेट खरीदना पड़ता है. और अगर आप भारी महसूस कर रहे है तो उधर बने गंदे से सुलभ शौचालय में 5 रुपे देकर हल्का हो सकते है. 



ऊपर पहुँच कर एक सुकून सा मिला दूर तक बिछी हुई हलके बादलो की चादर के बीच से दूसरी तरफ बनी पहाड़िया एक दम इन्द्रलोक का अहेसास कराती है. पेड़ो से टपकता पानी और ओस से भीगी सड़के किसी और ही दुनिया में ले जाती है.


 राहों में खिले फूलो को निहारना भी सुकून देह होता है. लोगो को अपने अपने अंदाज में मजे या बकर करते देखा जा सकता है. हमारे साथ एक भला मानुष भाई अपने साथ वायरलेस स्पीकर लाया जिससे पूर्ण रूप से संगीत का आनदं लिया गया. 



अब आगे का सारा माहौल आपके साथ जाने वाली मण्डली और यारो दोस्तों पर निर्भर करता है. अगर आप बड़े बुजुर्गो के साथ जायंगे तो मौसम आध्यात्मिक हो सकता है, अगर किसी कन्या के साथ जायंगे तो रोमेंटिक या मम्मी पापा के साथ जायंगे तो मौसम सांस्कृतिक हो सकता है. 



आप वहा चाहे तो शांति से किसी जगह बैठ कर कुदरत को निहार सकते है या ध्यान कर सकते है. और अगर आपको घूमते घूमते भूख लग गयी तो बैग खोल कर चिप्स और भुजिया का पैकेट खा सकते. अगर आप अपना खाने का सामान नहीं लिये तो कोई बात नहीं दुसरो को खाते हुए भी देख सकते है. या शुरुआत के गेट पर कुछ खाने के सामान की दुकाने है जंहा आप इडली, डोसा, वडा और न जाने क्या क्या खा सकते है. 



जगह के हिसाब से ये फोटोग्राफी के लिए एक धासू जगह है पर लड़के लोग ज्यादा खुश ना हो अपनी फोटो तो ऐसी ही आनी है जैसे पासपोर्ट साइज़ फोटो खिचवाते है.


 वंहा लकड़ी के बनी झोपडिया फोटोग्राफी के लिए एक बेहतरीन जगह है. 




और कुछ दूरी पर बना तालाब भी जगह की सुन्दरता को 8 – 10 चाँद लगाता है पर जैसे ही सूरज आसमान पर चढ़ने लगे तो आप समझ जाइये की चलने का टाइम हो गया. 



नंदी हिल्स भीड़ करने के लिए आपको कुछ बातो का ध्यान रखना अति जरुरी है

1 . सुबहे जल्दी पहुंचे.
2. स्वेटर या कोट साथ लेकर चले.
3. खाने का सामान भी साथ ले जाना बेहतर होगा.
4. ईयर फ़ोन या स्पीकर सेट ले जाना रोमांचक होगा.
5. किसी एक दोस्त की ज्यादा ना उतारे वो नाराज हो सकता है.
6. शकल को ऐसा जरुर रखे की फोटो ठीक ठाक लगे.
7. अपनी चीज और चीजों का ध्यान खुद रखे और आपकी चीज पर कोई ध्यान दे तो इग्नोर करना बेहतर होगा.
8. साथ जाने वालो को ज्यादा कानून ना बताये मजे करने में सहयोग दे.
9. कुछ संवेदनशील जगहों पर विवेक से काम ले हॉस्पिटल यहाँ से बहुत दूर है.


 नंदी हिल्स से उतारते टाइम बाइक को बिना स्टार्ट किये भी नीचे आया जा सकता है क्युकी ढलान पर गुरुत्वाकर्षण बल आपको गति में बनाये रखता है. पर किसी पढ़े लिखे भाई ने कहा था की ये करना खतरनाक है और कुछ लॉजिक भी बताये थे पर हम तो बिना स्टार्ट किये ही पहुच गए बाकि लोग अपने विवेक से काम ले. प्रकृति को इतने नजदीक से देखने के बाद और थोड़े से लम्बे सफ़र के बाद अगर भूख लगे तो रस्ते में कुछ अच्छे होटल भी देखे जा सकते है आप वहा रुक कर खाना खा सकते है पर पीने से परहेज करे. पुलिस रेगुलर चेकिंग पर होती है. और आखिर में अगर आप बंगलोर या आस पास घुमने आये है या रहते है तो टाइम निकलकर एक बार नंदी हिल्स जरुर जाना देखने लायक जगह है. 




"फिर मिलते है किसी और ट्रिप में तब तक के लिए हवा में प्रणाम"


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