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Showing posts from August, 2017

INDIBLOGGER - VOW MEET ( BANGLORE )

The IndiBlogger-VOW Meet


MYSORE PALACE

नींद शायद अभी खुली भी नहीं थी कि एक दम से कानों में आवाज पड़ी.सोनी भाई 1 घंटे में रेडी हो जाओ मैसूर चल रहे हैं.50 मिनट पूरे होते होतेहम सभी लोग गाड़ी में विराजमान हो गए थे.फ्लो फ्लोमें पता ही नहीं चलता टाइम का की कब लड़के तैयार हो जाये और घूमने-फिरने के मामले में तो हम वैसे ही चटकीले हैं. मैसूर की कर्नाटका के एक बड़े जिले के रूप में पहचान होती है.बेंगलुरु से तकरीबन 150 किलोमीटर दूर स्थित यह शहर अपनी हरियाली और पर्यावरण के लिए मशहूर है और मशहूर है मैसूर पैलेस और वृंदावन गार्डन के लिए भी. वैसे कहा तो यह भी जाता है कि मैसूर में देश कासबसे बेहतरीन दशहरा मनाया जाता है.
बेंगलुरु से मैसूर जाते वक्त सड़क सामान्यरूप से अच्छी है और रास्ते में आपको VIVO और OPPOमोबाइल के एडवर्टाइजमेंट के बीच पहाड़ और छोटे कस्बे भी दिखाई देंगे. कुछ कुछ जगहों पर तो केवल VIVO औरOPPOमोबाइल के ऐड ही दिखाई देंगे.बेंगलुरु मैसूर रोड वैसे काफी हद तक हरा भरा है और वाहन भी ठीक-ठाक संख्या में चलते हैं.
जैसे ही अपनीपैलेस रोड पर एंट्री हुई एक भाई बाइक लेकर हमारा पीछा करने लग गया. “दोस्त ने पूछा क्या है भाई” उसने भी बड़े गंभीर स्वर…

हम जोड़ेंगे

वो कहते है हम तोड़ेंगे ये बस्ता मुल्क हजार में तोड़ो धर्म पे तोड़े जात पे तोड़ो मजहब की हर बात पे तोड़ो तोड़ो इनको कर्मो पर  और रंग भेद औकात पे तोड़ो जो टूटे से ना जुड़ पाए तुम इन्हें हर इक हालात पे तोड़ो

हम कहते है हम छोड़ेंगे मजहब की हर बात को छोड़ो छोड़ो जात पात का लालच झूठ-गलत के साथ को छोड़ो छोड़ो वक़्त पुराने को जो बीत गयी उस बात को छोड़ो छोड़ो सारी उलझन को तुम जो तोड़े हर बात को छोड़ो

और हम भी मिलकर तोड़ेंगे भूख-कुपोषण-अज्ञान को तोड़ो तोडना है तो घमंड को तोड़ो पाखंडी के पाप को तोड़ो तोड़ो हर दिल बसे दर्द को मजहब की दीवार को तोड़ो फिर नया सवेरा हो जायेगा तुम बिखरी काली रात को तोड़ो

ये चार दिनों का मेला दुनिया तुम “दीप”सभी चिंता को छोड़ो ये दिल भी इक दिन जुड़ जायंगे तुम इंसा को इंसा से जोड़ो
प्रदीप सोनी 

स्वतंत्रता दिवस

मैदान के बीचो बीच खड़े होकर आस पास का नज़ारा एक दम रंगीन नज़र आ रहा है. हर हाथ में दिखते तिरंगे को देख कर इस चिल चिलाती धूप में भी साहस बह बह कर बहार निकल रहा है.

हमसे ठीक पीछे डम्बल पीटी वाले बच्चे खड़े है और उससे भी पीछे हरियाणा लोक गीत और नृत्य को पेश करने वाले अपने भाई लोग.

परेड सावधान "डम्म"

तभी मंच से घोषणा हुई. 

"हमारे बीच मुख्य अतिथि मोहोदय माननीय राज्यपाल हरियाणा पधार चुके है"

"परेड एक साथ सलामी देंगे सलामी दे"

"डम्म"

राज्यपाल जी ने झंडा फेहराया और इसी के साथ रोंगटे खड़े कर देने वाला हमारा प्यारा राष्ट्रगान बज उठा.


"जन गण मन अधिनायक जय है  भारत भाग्य विधाता "
ऐसा लग रहा था जैसे 11000 वाल्ट का करंट पुरे शारीर में दौड़ रहा हो.


"माननीय अतिथि मोहोदय परेड से सलामी लेते हुए."

"अगली टुकड़ी केंद्रीय विद्यालय रेवाड़ी से युवा स्काउट्स जो आन बान शान से हमारे अतिथि मोहोदये को सलामी देते हुए."


"डम्म डम्म डम्म "

और याद है अब भी स्कूल की तरफ से मिलने वाला रिफ्रेशमेंट का एक बिस्कुट और एक फ्रूटी का पैकेट. और उसके बाद हम भी लुप्त हो जाते…

CCD VS राजू की चाय

नोनू: चल यार चाय पीते है
मैं: चल
नोनू भाई “ CCD में ले गया ” हम वंहा बैठे ही थे की हम से भी बढ़िया कपडे पहने वेटर भाई आया और मेनू कार्ड पकड़ा गया.
अब अपन तो है भाई गरीब आदमी .... तो अपन ने ढूंढना शुरू किया सबसे सस्ती कौन सी है और भगवान झूठ ना बुलाए मेरे से तो ना तो नाम पढ़े जा रहे थे और बोलने से तो भगवान बचाए. मैंने नोनू को उँगली रख कर बता दिया ये मंगवा ले
नोनू: लाते..?? हां लेले बढ़िया है बस 150 की ही है
मैं: 150 की...?? पच भी जायेगी साले .... ??
नोनू: अरे मस्त होती है भाई “दिल्ली वाला रोहन ये ही पीता है”
मैं: अच्छा लेले भाई मैं भी गाँव में बताऊंगा 150 की चाय पी थी.
500 रुपे में घटिया सी चाय पीके हम निकल लिए चाय बिलकुल ऐसी थी जैसे MNC कंपनियों की मशीन वाली चाय होती है. दिल्ली से गाँव लौटते टाइम हाईवे पर तेज स्पीड से जाती गाडियों के बीच हम राजू के खोखे(चाय वाला ) पर रुके और ठंडी पेड़ की छाया में बिछे मूढो पर बैठ गए.
मैं: “छोटू बेटे 2 अदरक वाली और 2 फैन ले आ.” छोटू: ठीक है भईया.
मैं: ले भाई अब तू हमारी चाय पी.
नोनू: असली स्वाद तो इसी में है भाई.
राजू भाई का मेनू कार्ड: 6 रुपे - नार्मल चाय 8 रुपे – स्पेशल च…

फोटोकॉपी

पेपर शुरू होने में 5 मिनट थी. और फोटोकॉपी की दुकान चार किलोमीटर दूर.
मैंने बबलू को कहा चल फटा फट सैंपल पेपर ले और बैठ पीछे.
10 मिनट बाद हम फोटो स्टेट की दुकान पे.
बबलू: ने कहा “ भाई 0 साइज़ की 2 कॉपी बना दे जल्दी ” फोटो कॉपी भाई: कौन सा सब्जेक्ट है भाई. बबलू: कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग.
फोटो कॉपी भाई: खोपचे में गया और वह से जीरो साइज़ की 2 कॉपी ले आया. मैं: मन तो कर रहा था भाई तेरा माथा चूम लू तू तो भगवान है रे हमारी 10 मिनट बचा दी. पास हो गए तो पहली बियर तेरी दुकान पे आयगी. फोटो कॉपी भाई: अरे कुछ नहीं भाईतुम जैसो कीवजह से ही हमारा काम चल रहा है.
(साला समझ नहीं आया दुआ दे रहा है या बेईज्ज़ती कर रहा है)

हम फोटो कॉपी लेकर जाने लगे तभी पीछे से आवाज आई “ भाई वैसे अगला कौन सा पेपर है तुम्हारा ??? ”
मैं: बस कर पगले अब रुलाएगा क्या. बबलू: डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स.
पेपर शुरू होने के 10 मिनट बाद हम कॉलेज पहुंचे और दोनों ही पास भी हो गए.
भाई कॉलेज जिन्दगी के भी अपने अलग ही एडवेंचर है
हवा में प्रणाम


मजबूरी

उस दिन बॉस ने केबिन में बुलाया और बुलाकर शुरू किया अपना परम ज्ञान झाड़ना और बताना की उससे बड़ा अंतर्यामी कोई नहीं और मुझसे बड़ा नाकाबिल कोई नहीं. वो बता रहा था की काम कैसे किया जाता है और कैसे बात की जाती है. वो बता रहा था सीनियर्स की इज्ज़त कैसे करे और कैसे उनके आर्डर माने..... काफी देर से वो बोले जा रहा था और सुनते सुनते मेरे कानो में भी कुछ अनजानी आवाजे आने लगी.
वो आवाज़ थी मकान मालिक आंटी की जो आकर पूछ रही थी “बेटा किराया कब दोगे”. वो आवाज़ थी बिजली के बिल की जो बोल रहा था 110 यूनिट है इस महीने. वो आवाज़ थी BSNL की जो पिछले 10 दिन से कह रहा है की मुझे कटने से बचा लो. वो आवाज़ थी क्रेडिट कार्ड की जो जेब में उछालकर अपनी जान की खैर मांग रहा था. वो आवाज़ थी रोहन की जिसको किसी काम के लिए 5000 की जरुरत थी. वो आवाजे थी सर्फ साबुन तेल की जो बोल तो कुछ नहीं रहे थे लेकिन मैंसुन सब रहा था. और फिर एक आवाज दिल से आई बोला “क्या सुन रहा है इस रोशनी वाले की कह दे नहीं करनी तेरी गुलामी” पर तभी दिमाग ने कहा “एक आवाज के चक्कर में इतनी आवाजों को मत दबा”

“ठीक है सर आगे से ऐसा नहीं होगा” ये कहकर मैं वंहा से निकल लिया.

म…

फुर्सत

अक्सर दफ्तर से निकलने में शाम ढल जाती है और लेट होने के कारण हमेशा ये ही रहता है की बस तूफ़ान की तरह घर पंहुचा जाये. निकलने से पहले CISF वाले भाई से भी 2 मिनट हाल चाल पूछ लेते है और ठीक 2 मिनट बाद वही रट्टा रटाया डायलॉग “ ठीक है भैया शाम हो गयी फुर्सतमेंमिलताहूँ
औरयेहीसिलसिलाअकसरदिनों, हफ्तोंऔरमहीनोंतकचलतारहता.
उसदिनभीशामढलगयी उसदिनभीभाईसाहबगेटपरमिले