हम जोड़ेंगे

August 15, 2017



वो कहते है हम तोड़ेंगे
ये बस्ता मुल्क हजार में तोड़ो
धर्म पे तोड़े जात पे तोड़ो
मजहब की हर बात पे तोड़ो
तोड़ो इनको कर्मो पर 
और रंग भेद औकात पे तोड़ो
जो टूटे से ना जुड़ पाए
तुम इन्हें हर इक हालात पे तोड़ो


हम कहते है हम छोड़ेंगे
मजहब की हर बात को छोड़ो
छोड़ो जात पात का लालच
झूठ-गलत के साथ को छोड़ो
छोड़ो वक़्त पुराने को
जो बीत गयी उस बात को छोड़ो
छोड़ो सारी उलझन को
तुम जो तोड़े हर बात को छोड़ो


और हम भी मिलकर तोड़ेंगे
भूख-कुपोषण-अज्ञान को तोड़ो
तोडना है तो घमंड को तोड़ो
पाखंडी के पाप को तोड़ो
तोड़ो हर दिल बसे दर्द को
मजहब की दीवार को तोड़ो
फिर नया सवेरा हो जायेगा
तुम बिखरी काली रात को तोड़ो


ये चार दिनों का मेला दुनिया
तुम दीप सभी चिंता को छोड़ो
ये दिल भी इक दिन जुड़ जायंगे
तुम इंसा को इंसा से जोड़ो

प्रदीप सोनी 


You Might Also Like

0 comments

Video

Google +