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Showing posts from May, 2018

कब्बाली डा ( किस्सा रजनीकांत फैन कुमार का )

मैं: एक चाय देना भईया...!!!
कुमार: राजा सर “रजनीकांत सुपर हीरो सर, फुल एक्शन, स्टाइल. कबाली सर बुक टिकेट”.
मैं चाय का कप हाथ में लिए उसकी टूटी फूटी हिंदी + अंग्रेजी + तमिल सुनता और चाय का रस लेता.
कुमार: “ok सर कबाली डा ....!!!!” और वो अपनी चाय की ट्रोली ले गया.
कुमार हमारे कैंटीन के डिलीवरी पर्सन और रजनीकांत के डाई हार्ट फैन. जब भी इनसे मुलाकात होती तो रजनीकांत के बारे में बताने लगते.कबाली मूवी आने में जब 6 महीने का वक्त था तब ही से वो शुरू “ राजा सर कबाली मूवी फुल एक्शन मूवी ” फ्रेंड्स के साथ देखना सर.
तब एडमिन ने उसकी इस कमजोरी का फायदा उठाया और जैसे ही वो चाय देने आता तो मैं कुमार को बोलता “काबाली डा... रजनीकांत सुपरस्टार ” और कुमार इतनाखुश होता की चाय के साथ बिस्कुट का पैकेट भी पकड़ा जाता.
एक बार तो वाक्या ये हुआ की अपन कंप्यूटर पर बैठे काम कर रहे की वो आया... “सर राजा सर प्लीज कम आउटसाइड”
मैं बहार गया तो उधर कुमार के साथ एक जनाब थे.
कुमार: “मुरली राजा सर फुल रजनी फैन”
और मुरली भी बड़ी उत्सुकता से मुस्कुराते हुए मुझसे हाथ मिलाने लगा.
मुरली: सर आई मुरली सुपरस्टार रजनीकांत फैन
कुमार: ओके राज…

प्रगति ( कहानी अपनापन तोडती हुई प्रगति की )

वो बिखरी हुई टॉफी बिस्किट की दुकान हुआ करती. सुबहें की डबल रोटी के पैकेट से धूल झाड कर खरीदना पड़ता था. वो तक़रीबन तक़रीबन बुढ़ापे में आ चुके अंकल भी साफ़ सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखते. काफी बार तो गुस्सा भी आ जाता है दुकान की हालत देख कर. मन ही मन मन करता की नहीं लेना बूढ़े से सामान फिर अगली दुकान की तरफ बढ़ते कदम फिर से उसी दुकान पर घूम जाते.
“ यार ताऊ कब का पैकेट हैये ... ??? “ “ अरे परसों ही तो माल आया है .... मजाक करता है कब का पैकेट है “
और अक्सर मैं आइसक्रीम रखने वाले फ्रीज पर बैठ जाता और फिर हम सामान्य ज्ञान की बाते करने लगते. उसे बीच “बीच-बीच” में बीडी, पेप्सी लेने आने वाले पडोसी भी कुछ देर ठहर कर फिर ताऊ से सामान और मजे लेकर जाया करते.
आज भी उसी दुकान के सामने से निकलता हूँ. शीशे से ढकी उस दुकान अन्दर ऐ.सी. लगे हुए है साफ़ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है. आज ताऊ ने एक बड़ी आइसक्रीम कंपनी की फ़्रेचैसी ले ली है. और सब कुछ बड़े ही सभ्य और बेहतर तरीके से हो रहा है उस दुकान में.
लेकिन अब वो दुकान हमारी गली के बहुत से लोगो की पहुच से बाहर हो गयी है. जो लोग तकरीबन रोज़ ही पहुँच जाया करते 2 पल बतला…

कर्ण और विभीषण ( एक सार - एक कहानी )

बैठे बैठे सोच का दायरा हिन्दू धर्म के दो प्रमुख कृत्य महाभारत और रामायण पर जा पंहुचा. इनमे सबसे ज्यादा ध्यान दो किरदारों ने अपनी तरफ खीचा. जो थे महाभारत के दानवीर कर्ण और रामायण के विभीषण.
मैं समझने की कोशिश कर रहा था की हमारा समाज किस प्रकार से चीजो को दो तरफ़ा देखता है समझता है.
इसी सन्दर्भ को समझने के लिए हम मान लेते है की भगवान् जो करते है हमेशा अच्छाई और सच्चाई के लिए करते है और इसी के साथ ध्यान करते है इन दोनों किरदारों का.
जब महाभारत का रण चल रहा था तो शक्तिशाली योद्धा दानवीर कर्ण भगवान् और पांड्वो के खिलाफ खड़ा था. कर्ण का एक मात्र धेयेय था अपने मित्र दर्योधन के हक़ में लड़ना. कर्ण जानता था की वो बुराई के साथ खड़ा है फिर भी वो भगवान् के खिलाफ़ लड़ा और समाज में आज भी उसे देव समान इज्ज़त मान प्राप्त है.
और सिक्के के दुसरे पहलु को देखते है की विभीषण ने अच्छाई का साथ दिया और अपने बुरे भाई रावण को मारने का भेद राम को बताया हालांकि विभीषण ने सच्चाई का साथ दिया पर समाज आज भी उसे धिक्कार भावना की नजरो से देखता है.
तो क्या इन दोनों किरदारों से हमे ज्ञात नहीं होता की अच्छाई या बुराई हम किसी के भी सा…