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Showing posts from June, 2018

परिंदों के आरमान

बेहद सुलझी हस्ती लिए वो शख्स काफी सरल ही रहता था. दिमाग पर लोड नाम की कोई चीज़ नहीं. खाना पीना ऐश करना शायद इन्ही के लिए परमात्मा ने उसे धरती पर भेजा था.
वैसे तो उस शख्स को में बोहोत थोड़े समय के लिए जान पाया लेकिन उसके दोस्तों के साथ उसके संबंधो के देखते हुए ये समझने में बिल्कुल समय नहीं लगा की ये बंदा तो विरला ही है. ना दिखावा, ना ढोंग, ना खामखाँ की हवा बाजी बस दिल की बात तुरंत जबान पर. शायद यही उसे अपनी तरह का एक प्राणी बनती थी.
लेकिन ये उम्र जवान !!! ये जवानी कमबख्त होती ही ऐसी है. ना जाने कितनी बीमारीया लेकर आती है. ना जाने कितने ही युवाओ को लील गयी ये जवानी की बीमारी. ना जाने कितनो का दिन का चैन और रातो की नींद हराम की है इस बीमारी ने. वो भी जवान था कितना बचता इस रोग से.
अचानक से आये उसके बर्ताव के परिवर्तन को मैं पहचान नहीं पाया. जब भी मिलता जल्दी में मिलता. और कहता काम है कुछ फुर्सत में आता हूँ. खड़े होकर आधा आधा घंटे बात करने की जगह 2 मिनट के हाल चाल पूछने ने ले ली. उसके साधारण चलने की गति भी ऐसी हो चली थी जैसे सीटी देने के बाद रेल की तरफ बढ़ते लोगो की हो जाती है. जब भी दिखता नज़रे …