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Showing posts from July, 2018

कवच कुंडल दान

सुबह बग़ीचे मे पानी डालते वक़्त एका एक कोई मंगता आया.

करण: “बोलो प्रभु जो माँगोगे वो देगा करण गाड़ी, बंगले, दौलत शौहरत क़सम से पैसा बहुत है”

मंगता: “गाड़ी बंगले नही बेटा ये जो कवच से पहन रखे है ये दे दे”

करण: अरे इंद्र महाराज आप ??? कर दी ना इंसानों वाली हरकत आ गए बेटे को बचाने ... लो कवच कुंडल याद करोगे करण भी कोई था दानी



.

कवच के बदले मे इंद्र जी ने एका-अग्नि हथियार भी दिया था करण को जो दुश्मन को भस्म कर देता है दिवाली वाले अनार कि तरह

पांचाली

सुबह खाने कि सर्च मे निकले पांडव लोग द्रौपदी के स्वयंवर मे जा घुसे. और लगे घुमती मछली को तीर मारने.

वहाँ  मछली की आँख फोड़ते हुए अर्जुन ने स्वयंवर मे द्रौपदी को जीत लिया और उन्हें घर ले पहुँचा जहाँ माता कुंती डिनर बना रही थी.





भीम चिल्लाया: "ऐ माँ देख हम क्या लाए है...???"

कुंती: "अरे बेटा जो भी लाए हो पाँच हिस्सों मे बाट लो."

बस वही से द्रौपदी पाँच पांडवों कि पत्नी कहलाती है.





एका-अग्नि

करण युद्ध मे पांडवों पर ऐसे टूट के पड़ा जैसे नई सरकार आते ही अफसरो पर टूट पड़ती है. तब गोविंद को लगा आज तो ये अर्जुन कि फ़ोटो दीवार पर लटका कर ही रहेगा तभी कृष्ण रथ लेकर भागे भीड़ मे छिपने के लिए.

वहा कृष्ण ने मिनटोस खाई और बुलाया घतोटकच को और बोले:

कृष्ण: "बेटा घतोटकच करण पगला गया है हमारी सेना को उठा उठा कर फैंक रहा है बचा ले हमें". 


घतोटकच: अच्छा जी हम पर हमला.. अभी फैसला करता हूँ उनका. 

अभी 5 मिनट मे आया मैं !!! 

फिर जाते ही घतोटकच ने कौरवो को ऐसे पेला जैसे संभित पात्रा कांग्रेसियों को पेलता है. 

कौरवों कि हालत देख दुर्योधन करण के पास गया और बोला: 
"तू ही कर भाई कुछ नही सारे ही फ़्लैट आज डिलीवर हो जाऐंगे अपने" 

तभी युद्ध मे जोर से बम फटा और आग उठी. घतोटकच राख हो चुका था सारे पाडंव छाती पीट पीट कर रो रहे थे. 

करण भी माथा पकड़ कर बैठा था.

और कृष्ण जी महाराज मुह ढक कर खी खी कर रहे थे. 

इसी के साथ एका-अग्नि इस्तेमाल हो चुकि थी.



अभिमन्यु का रण

अभिमन्यु रथ पर विराजमान पूर्ण वेग से व्यूह कि और अगरसर था. माँ के गर्भ से व्यूह भेदने कि शिक्षा लिए वो कौरवी सेना पर टूट रहा.
एक के बाद एक व्यूह को ऐसे फाडता रहा जैसे राहुल बाबा देश के प्रधानमंत्री द्वारा बनाए सैंवधानिक नियमों को भरी सभा मे फाड़ता है.
मगर वह इस बात से कही अनजान था कि व्यूह संरचना केवल उसे ही निमटाने के लिए की गई है. जैसे जैसे वह व्यूह के अगले दौर मे पहुँचता कौरवी सेना के पिछले से ज़्यादा शक्तिमान योद्धा से झप्पीया मिलती.
पाँचवे दौर के बाद जब अभिमन्यु लड़ते लड़ते थक चुका और उससे आगे के व्यूह भेदने कि शिक्षा भी उसके पास नही थी तब इस बात का फ़ायदा उठा कौरवों ने उस पर एक साथ हमला कर दिया.
युद्ध के नियमों के ख़िलाफ़ और कायरता का प्रदर्शन करते हुए कौरवों ने अभिमन्यु को अकेला पा कर मार डाला.
मगर कहा जाता है कि मंत्री जी ( भगवान श्री कृष्ण ) भी चाहते थे कि कौरव युद्ध के नियम तोड़ अभिमन्यु को मारे ताकि अगली बार हम ( पांडव ) भी उसका हवाला देकर नियम तोड़ सके. 



छुट्टी

बेटे के छुट्टी आने के दिन गिनता बापू खाट पर दवाई लेकर लेटा हुआ है और माँ गोबर को दीवारों पर थाप रही है. निम्मी भी मिटटी खाने से बाज नहीं आती और उसकी मम्मी गाय का दूध निकाल रही है. सोनू अभी पांचवी में ही है पर सारी शाम गलियों में कंचे बजाता घूमता है. कमबख्त पढाई तो जैसे उसके सर से गुजरती है. आज बापू कुछ ज्यादा ही ख़ास रहा है. ना जाने ऐसे और कितने ही ख्याल उसके दिमाग में घर कर रहे है .
आँखे बंद कर के वो सोच रहा की की एक बार घर बात कर ही लू. की तभी हेलीकाप्टर की पंखड़ीया घुमने लगी और विनोद की धड़कन तेज हो गयी. हाथ में थमी पर पकड़ मजबूत हो गयी. कमर पर बंधी ग्रनेड की बेल्ट और गोलियों की मैगजीन को सँभालते हुए विनोद ने आँख खोली. आज वो अपने पहले स्पेशल ऑपरेशन के लिए उड़ान भर रहा है .जहा से वापसी में या तो तमगे मिलेंगे या फिर तिरंगे की चादर. पर जाने से पहले वो घर बात करना चाहता था.

युद्ध का कर्ण

रण में कौरव और पांडव आमने सामने थे. और दूर दूर तक फैली दोनों सेनाए आने वाले विध्वंस काल के आगोश में समाने वाली थी. 
तभी दूर कही महलों में नारिया युद्ध के कारणों पर चर्चा कर रही थी की दुर्योधन के लालच से युद्ध हो रहा है, किसी ने कहा द्रोपदी के आपमान से, कोई कहने लगी की कारण रहा है कर्ण का दुर्योधन के साथ मिल जाना. और उधर ही महल के किसी कौने में दर्पण के सामने बैठी कुंती ये सब सुनकर अश्क धार रो रही थी.

क्युकी शायद उसे दर्पण में युद्ध का कारण दिखाई पड़ रहा था.