अभिमन्यु का रण




अभिमन्यु रथ पर विराजमान पूर्ण वेग से व्यूह कि और अगरसर था. माँ के गर्भ से व्यूह भेदने कि शिक्षा लिए वो कौरवी सेना पर टूट रहा.

एक के बाद एक व्यूह को ऐसे फाडता रहा जैसे राहुल बाबा देश के प्रधानमंत्री द्वारा बनाए सैंवधानिक नियमों को भरी सभा मे फाड़ता है.

मगर वह इस बात से कही अनजान था कि व्यूह संरचना केवल उसे ही निमटाने के लिए की गई है. जैसे जैसे वह व्यूह के अगले दौर मे पहुँचता कौरवी सेना के पिछले से ज़्यादा शक्तिमान योद्धा से झप्पीया मिलती.

पाँचवे दौर के बाद जब अभिमन्यु लड़ते लड़ते थक चुका और उससे आगे के व्यूह भेदने कि शिक्षा भी उसके पास नही थी तब इस बात का फ़ायदा उठा कौरवों ने उस पर एक साथ हमला कर दिया.

युद्ध के नियमों के ख़िलाफ़ और कायरता का प्रदर्शन करते हुए कौरवों ने अभिमन्यु को अकेला पा कर मार डाला.

मगर कहा जाता है कि मंत्री जी ( भगवान श्री कृष्ण ) भी चाहते थे कि कौरव युद्ध के नियम तोड़ अभिमन्यु को मारे ताकि अगली बार हम ( पांडव ) भी उसका हवाला देकर नियम तोड़ सके. 




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