युद्ध का कर्ण



रण में कौरव और पांडव आमने सामने थे. और दूर दूर तक फैली दोनों सेनाए आने वाले विध्वंस काल के आगोश में समाने वाली थी. 

तभी दूर कही महलों में नारिया युद्ध के कारणों पर चर्चा कर रही थी की दुर्योधन के लालच से युद्ध हो रहा है, किसी ने कहा द्रोपदी के आपमान से, कोई कहने लगी की कारण रहा है कर्ण का दुर्योधन के साथ मिल जाना. और उधर ही महल के किसी कौने में दर्पण के सामने बैठी कुंती ये सब सुनकर अश्क धार रो रही थी.


क्युकी शायद उसे दर्पण में युद्ध का कारण दिखाई पड़ रहा था.


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