इक सफ़र सामर्थ्य का

September 02, 2018


कहा जाता है की इंसान को अपनी औकात के हिसाब से सपने देखने चाहिए और पैर उतने ही पसारो जितनी आपकी रजाई हो. लेकिन कमब्खत ये समाज क्या जाने जब सपने पाले जाते है तो आसमान की ऊचाई नहीं देखि जाती.

बचपन के याद खाने से इक किस्से का जिक्र करना चाहता हूँ. शायद वो कॉलेज का दौर था नये नये बच्चे जब कॉलेज की देहलीज तक पहुचते है तो हज़ारो सपने और हज़ारो उमीदे लिए पहुँचते है. कुछ बनने के लिए, खुद को सिद्ध करने के लिए की जीवन में हम भी कुछ कर सकते है.

और युवा जीवन की सबसे बड़ी समर्थता सिद्ध करने के तरीके भी अलबेले ही होते है. बड़ी गाडी, बड़ी कोठी, नौकर चाकर और विदेशी छुट्टीया. केवल इन्ही से हम सिद्ध कर सकते है की हम कामयाब है.

तो इक दिन मैं और मेरा मित्र पवन ट्रेक्टर की घांस फूस से भरी ट्राली में लोड होकर जा रहे थे. हम दोनों बैठे बैठे बाते कर रहे थे की हमसे कुछ उचाई पर हवाई जहाज उड़ रहा था. उसकी आवाज कुछ इतनी थी की हमारा ध्यान भटक गया. काफी चमक रहा था वो धुप की रौशनी भी उस से टकराकर आँखों को चुभ रही थी.

तब मैंने हवाई जहाज को देखते देखते पवन को कहा " पवन यार एक दिन जरुर में हवाई जहाज में बैठूँगा वो भी बिज़नस क्लास में "

पवन: " रहने दे तू ..क्या बैठेगा हवाई जहाज में ... पता है कितना महंगा होता है अपने बस में ही घूम ले "

ये पहली बार था जब किसी ने सीधा सीधा औकात को चेलेंज किया था.

आज उन बातो को लगभग आठ साल हो चुके है और मैं 30 से भी ज्यादा हवाई यात्रा कर चूका हूँ. लेकिन हर बार प्लेन में चढ़ते हुए अपने दोस्त पवन को याद करता हूँ. और अक्सर मन ही मन कहता हूँ " पवन 10, पवन 16, पवन 26, कितना सुकून देता है उस काम को करना जो लोग कहे की तुम नहीं कर पाओगे.

एक ट्रैवलर होने के भी अनेको नुकसान है की सपने बढ़ते चले जाते है, दुनिया छोटी पड़ जाती है और इंतज़ार बढ़ जाता है. अखिल भारतीय स्तर पर देश की लगभग हर ट्रेवल डेस्टिनेशन निपटा चुके है हम. लोगो से मिलना और वहा की संस्कृति समझना भी अपने आप में एक एडवेंचर है जो बखूबी हम करने की कोशिश करते है.

अब इस दिल में जलती लौ प्रचंड रूप से जलने लगी है की चाहे कुछ हो जाये जिन्दगी में एक बार यूरोप जरूर घूमके आना है. मुझे लगता है वो दिन भी ज्यादा दूर नहीं है जब हम स्विट्ज़रलैंड से फोटो डालेंगे और हम से जलने वाले लोग भी लाइक करेंगे मगर अभी नहीं पता की इंतज़ार कितना काटना है. लेकिन होगा जरूर देख लेना .



और हमारे सामर्थ्य को प्ररित करती इस तरह की #SayYesToTheWorld  योजनाए इक दिन जरुर मुक्कमल होंगी.
किस्मत ने चाहा तो जरुर मुक्कमल होगी.



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