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Showing posts from December, 2018

भगवान नहीं दिखे

इस बात को तक़रीबन 10 साल गुजर चले है मगर आज भी जब ये किस्सा याद करता हूँ तो आँखों में चमक और होठो पर हंसी लहर सी जाती है.
वो शनिवार की दोपहर में सचिन ने एकाएक बुलाया और कहा “आज खाटू श्याम जी के चले क्या..?” हम चाचा – ताऊ केबालको का गुट अगले आधे घंटे में तैयार था. निकलने से पहले 10 मिनट में यात्रा का सारा खांचा तैयार हो गया और खाने पीने का माल बिस्कुट भुजिया इकठा कर लिया गया. निकलते निकलते वक्त शाम के 5 का हो चला था और 5 :30 होते होते हम विचित्र प्राणियों से भरी हुई मारुती 800 दिल्ली से खाटू शाम जाने वाले हाईवे पर पूर्ण रफ़्तार से चल रही थी.
ये वाक्या मेरे जेहन में इसलिए भी ज्यादा घर करता है क्युकी घर वालो की अनुपस्थिति में ये मेरे जीवन की पहली यात्रा थी तो मैं काफी खुश और रोमांचित महसूस कर रहा था. राजस्थान में घुसते ही एक शानदार ढाबे पर गाड़ी लगी और हम लोग खाने पर टूट पड़े इतना तो ध्यान है की पेट फटने तक खाना खाया था.
लम्बी दूरी होने के कारण हमारे फर्नान्डो अलोंसो (सचिन) और माइकेल शुमाकर (कालू) स्टीयरिंग बदल बदल के गाडी चला रहे थे. गाडी में बजते गाने और फटी हुई आवाज में पीछे पीछे गाते हम, ढल…

सफ़र

ऐ मेरे सफर के रहियो एक दिन ये सफर भी नहीं होगा और यह जिंदगी भी नहीं
मैं इसलिए नहीं चलता कि मुझे तुम्हें दिखाना है मैं इसलिए चलता हूं कि ये रास्ता कुछ अंजाना है
मिलेंगे तुमसे राही और तुमसे मुसाफिर भी मुझे तो बस हाथ मिलाना है और आगे बढ़ते जाना है
उम्मीद नहीं करता मैं तुम्हारे साथ चलने की उम्मीद बस ये कि चलो साथ दो पल के लिए
सफर लम्बा है और मंजिल दूर तुम शायद चल नहीं पाओगे और मंजिल आ नहीं पाएगी
मिलूंगा मैं तुमसे मुस्कुरा कर और मुस्कुराकर ही हाल पूछूंगा
लेकिन परदेसी हूं मैं मुस्कुराकर छोड़ जाऊंगा तुम्हें बीच राह में
कभी यह गिला ना करना कि छोड़ गया वो हमें बिछड़न पता है इसलिए गले नहीं लगाते
हमेशा साथ निभाने का वादा नहीं करता मैं मेरी मंजिल दूर है और सफर लंबा
कुछ देर ठहर कर जानना चाहता हूं तुम्हें तुम्हें नहीं मैं जानना चाहता हूं खुदा की उस फितरत को
बनाता है वही मिटाता है वही हस्ती ही है इक रोज मिट ही जाएगी
मुझे जल्दी है मैं इंतजार नहीं कर पाऊंगा अगर तुम ठहर गए तो मैं रुक नहीं पाऊंगा