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Showing posts from 2019

भटकती आत्मा

रात के तक़रीबन दस बज चुके थे और रेल अपने समय से करीब 1 घंटा देरी से स्टेशन पहुंची. धीरे धीरे जैसे ही ट्रेन के चक्के रुके तो रेल में खड़े लोगो ने दरवाजे पर खड़े लोगो को धक्का मारना शुरू कर दिया ताकि घर जाने के लिए कोई टेम्पो, ट्रक का जुगाड़ हो जाए. जैसा की आप जानते है की छोटे शहरों में तो रात के दस बजे ही आधी रात घोषित कर दी जाती है और सडको पर घोर शांति पसर जाती है.
अब सवारियों से लगने वाले धक्को से परेशान मैं ट्रेन की सीट पर फिर बैठ गया झल्लाते हुए “सालों तुम मरो पहले हमारी देखी जायगी”. अब धीरे धीरे सारी भीड़ निकल गयी और मैं आराम से अपना पिट्ठू बैग लिए फ़िल्मी स्टाइल में उतरा. और धीरे धीरे स्टेशन की एग्जिट गेट की तरफ निकला. लकिन वहा तो घोर सन्नाट था ना ऑटो, ना रिक्शा, ना ट्रक, ना हवाई जहाज. चारो तरफ शांति ही शांति थी अब मैं अपने आप को कोस रहा की “ओर बैठ ले सीट पे ... बन ले महाराजा...आराम से उतुरुंगा “ की इतने में दूर से आते इक ऑटो की आवाज कानो में सुनाई पड़ी. और देखते ही देखते ऑटो सामने आ रुका और भाई ने बैकग्राउंड में बजते हुए गाने की आवाज़ मंदी करते हुए कहा. “हां भाईसाहब कहा जाना है टोरंटो, क…

मकसद

मैं उस इंसान से जब पहली बार मिला तभी मुझे अहसास हुआ की इस के साथ वक्त बड़ा स्वाद रहने वाला है. हमारी क्लास में वो भाई नया आया था. धीरे धीरे हम लोग एक दूसरे से मिलने लगे और समझने लगे. हमारी हरकते और सोच भी एकदम मैच करती हमारे चुटकुले, डायलॉग और नाटक सब ही तो क्लास में रंग भर देतेलौंडो के बीच हमारी वो अहमियत हो चली थी जो मोबाइल में डाटा पैक की होती है.
आलम ये था की किसी को मुझे ढूँढना होता तो वो उसे फ़ोन करके पूछता की प्रदीप कहा है. कॉलेज से फ़रार होकर रोहतक की वो पहली मूवी या वो कॉलेज की छत पर गिने चुने दोस्तों के साथ कुरकुरे और पेप्सी की दो लीटर की बोतल खीच जाना या होली का वो त्यौहार जब हमने एक दूसरे को खेतो खेत भगा भगा कर पक्के रंग से पेला था और ना जाने कितनी यादे जिसे याद कर के दिल ख़ुश और उदास दोनों हो जाता है.
आज इन बातो को कई साल हो चले है और वो इंसान जिन्दगी से जैसे लुप्त सा हो गया है मुझे नहीं पता जिंदा है या जा लिया या क्या कर रहा है क्यूकी अरसा हो गया है संवाद किये.
आप लोगो को ये कहानी कुछ कुछ आपकी कहानी जैसी लग रही है ना ?? आपका भी कोई ऐसा दोस्त रहा होगा ?? आपने भी ऐसे ही मजे किये …