निदेश



पिछले दिनों हिंदी कर्येशाला की क्लास लेते हुए कक्षा एक शब्द अंतर पर आ रुके.

सर मोहोदय ने सफ़ेद बोर्ड पर लाइन खीचते हुए अगल बगल में दो शब्द लिखे

निदेश | निर्देश

और मुड़ते हुए क्लास में उपस्तिथ सभी लोगो से अंतर बताने को कहा. काफी लोगो ने अपनी तर्क शक्ति से सही गलत जवाब दिए और कुछ ने सरे आम तुक्के मारे.

सर जी ने कहा

निदेश: ये पूर्ण आदेश होता है जैसे तुम्हे कल सुबह 7 बजे की फ्लाइट से मुंबई जाना है मतलब कल सुबह वाली फ्लाइट से ही जाना है.

और

निर्देश: ये आदेश होता है मगर इसमें आप के पास अपनी सुहूलियत की आजादी होती है जैसे आप को कल शाम तक मुंबई पहुंचना है कब जाना कैसे जाना इसकी आजादी आप के पास है चाहे प्लेन से जाओ, ट्रेन से जाओ या उसेन बोल्ट बनो पर शाम तक मुंबई पहुँचो.

फिर निदेश और निर्देश समझाने के लिए सर जी ने एक कहानी बताना शुरू किया.

“मैं आयकर विभाग में कार्यरत था तब एक बार हमे जम्मू कश्मीर में किसी बड़े कारोबारी के यहाँ रेड करने का आदेश हुआ. 30 अधिकारियो को पत्र मिला की सो और सो अधिकारी परसों सुबह जम्मू बस स्टैंड पर रिपोर्ट करे. सबसे नीचे एक निर्देश पंक्ति में लिख था जम्मू का तापमान 10 डिग्री है अपनी सुविधा अनुसार कपड़े ले जावे".

अब सारे अजित डोभाल सुबह जम्मू स्टेशन पर उतरे और वंहा उतरते ही उन्हें सर्दी लगे. दिल्ली के 50 डिग्री तापमान से सीधा 10 डिग्री में आ पहुंचे थे. अब वहा कुछ लोग आधी बाजु की स्वेटर में थे तो कोई ट्रेक सूट. कुछ समय बाद हम सभी लोगो को सर्दी लगने लगी. हमने अपने अधिकारी को दिल्ली फ़ोन किया की साहब यहाँ तो बोहोत सर्दी है हमे स्वेटर की जरुरत है क्या करे...?

अब जैसा की सरकारी तंत्र में होता है की पैसा सरकारी से सरकारी खाते में ही जाना चाहिए तब साहब ने आदेश दिया की जम्मू में खादी ग्राम उद्योग से 30 लोगो के लिए स्वेटर ले लेना और यहाँ पहुँच कर बिल जमा करवा देना. सभी ने स्वेटर लिए और लोकल पुलिस स्टेशन आगे की करवाई के लिए निकल लिए जंहा से पुलिस प्रोटेक्शन मिलनी थी.

अगले दिन सुबह रेड चालू हुई और पूरे दिन अधिकारियो ने अपनी कारवाई की और अपना मकसद पूरा कर रिपोर्ट बनाई और साईट से निकल लिए और पुलिस प्रोटेक्शन भी रिलीज कर दी.

अब जैसा की अक्सर होता है पैसे वाले लोगो के अपने पर्सनल गुंडे भी होते है और उन गुंडों को निदेश हो चुके थे की तीस लोग है हरे स्वेटर में अभी निकले है उनकी सेवा में कोई कसर ना रहे. शाम को खादी ग्राम उद्योग से खरीदी हरे रंग की स्वेटर पहने आय कर विभाग के 30 अधिकारी जम्मू की सडको पर घुमने फिरने निकले तो कुछ अनजान गुंडे आये और उन अधिकारियो की तहे दिल से सेवा की.

इस कहानी को विराम देते हुए सर जी ने बताया

हमे अपने निर्देशों का इमानदारी से पालन करना चाहिए ताकि निदेश देने की नौबत ना आये.

वैसे 30 पिट आये ये तो धिक्कार वाली बात है यार


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