Why opposition is asking proofs of Air Strike



इस अवधारणा को समझने के लिए हम एक कहानी का उदहारण लेंगे
 
पुराने समय की बात है एक गाँव में दो छोटे बच्चे रहते थे चुन्नू और मुन्नू. दोनों की उम्र तक़रीबन 8 से 10 साल. उनमे इतनी गहरी दोस्ती की दोनों पूरे गाँव में सारा दिन खेलते, कूदते, घूमते, फिरते रहते ओर तो ओर जंगल तक भी साथ जाते. एक रोज जब चुन्नू मुन्नू कुँए के किनारे खेल रहे थे तो अचानक चुन्नू का पैर फिसल गया और वो कुँए में जा गिरा. उस मंजर को देख मुन्नू बहुत डर गया और आस पास लोगो को मदद के लिए ढूँढने लगा मगर वहा दूर दूर तक कोई नहीं था. मुन्नू काफी डर गया और तब उसने साहस  कर के कुँए के साथ लगी रस्सी नीचे डाल दी और चुन्नू को रस्सी पकड़ने को कहा. चुन्नू को डूबता देख कर मुन्नू में एक अद्भुत शक्ति का प्रवाह हो गया और उसे पता ही नहीं लगा की उसकी उम्र और असली काबिलियत क्या है. वो तो कुँए से अपने से भरी चुन्नू को खींच खींच कर निकाल रहा था और काफी देर की मशकत के बाद चुन्नू कुँए से वापिस आ गया.
 
अब दोनों नाचते गाते गाँव जा पहुंचा और उत्सुकता में चारपाई पर बैठे बुजुर्ग बाबा को बोले की बाबा “ चुन्नू कुआँ में गिर गया था मैंने रस्सी डाली और बड़ी मुश्किल से उसे ऊपर खींचा” सारी कहानी सुनने के बाद बुजुर्ग ने कहा की मुन्नू  मुझे बहका मत तेरा खुद का वजन 25 किलो है और तो 30 किलो के चुन्नू को कैसे खींच सकता है. चलो दोनों भग जाओ मेरे साथ बकवास मत करो.
 
फिर चुन्नू मुन्नू  ने यही कहानी गाँव के रहीम चाचा को बताई की “ चुन्नू कुआँ में गिर गया था मैंने रस्सी डाली और बड़ी मुश्किल से उसे ऊपर खींचा”  लेकिन रहीम चाचा ने भी दोनों को धमका कर भगा दिया.
 
ऐसे ही चुन्नू मुन्नू ने गाँव में जिस जिस को ये कहानी बताई किसी ने उनकी बात पर यकीन नहीं किया और उन्हें शैतान बता कर भगा दिया. लेकिन आप शायद अभी तक इस कहानी और एयर स्ट्राइक और सबूत से रिलेट नहीं कर पा रहे होंगे ना ?
 
इस कहानी में गाँव वालो जैसा हाल आज हमारे देश के विपक्ष का हो रहा है. वो भारतीय सेना को इतना काबिल ही नहीं मानते की वह जाकर पाकिस्तान में आतंकियों पर हमला कर सके या बदला ले सके इसीलिए हमलो के सबूत मांगे जाते है. विपक्ष उस बुजुर्ग और रहीम चाचा की तरह है जिसे चुन्नू मुन्नू की काबिलियत पर भरोसा नहीं. उनके दिमाग में किसी नए आयाम को रखना दूर की चीज़ है. उन्होंने सारी जिन्दगी हमलो पर कड़ी निंदा करना सीखा है और उनकी धारणा भी यही  बन चुकी है की हमला होने पर निंदा ही की जानी चाहिए हमला नहीं. इनसे ये बर्दाश नहीं हो पा रहा की ये सरकार हमले क्यों कर रही है. मगर आज हमारे देश की सरकार ने एयर स्ट्राइक कर के अपने सामर्थ्य का प्रदर्शन कर सारी दुनिया को ये साफ़ सन्देश दिया है की भारत को ऊँगली करना अब सस्ता और आसान नहीं.
 
जय हिन्द


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